
फोटो में अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई (सोर्स: ANI)
Middle East Tensions: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाला होर्मुज स्ट्रेट अब ईरान-अमेरिका युद्ध के केंद्र में आ गया है। तनाव भड़कने के पीछे अमरीकी राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की मानी जा रही है। ईरान की समाचार एजेंसी 'फार्स' ने दावा किया है कि ईरानी नौसेना ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे अमरीकी गश्ती पोत पर दो मिसाइलों से हमला किया है। तेहरान का आरोप है कि अमरीकी गश्ती नौका ने बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया और नेविगेशन नियमों का उल्लंघन करते हुए 'जास्क' शहर के तटीय क्षेत्र में प्रवेश की कोशिश की। ईरान के अनुसार, हमले के बाद अमरीकी जहाज को पीछे हटने और क्षेत्र से भागने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं, अमरीकी सेंट्रल कमांड ने ऐसे किसी हमले से इंकार किया है। उधर, रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो मालवाहक जहाजों पर हमला हुआ है। ईरान के पास एक बल्क कैरियर पर छोटी नौकाओं द्वारा और यूएई के पास एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से प्रहार किया गया। यूएई ने आरोप लगाया है कि ईरान ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े 'एमवी बरकाह' टैंकर पर दो सुसाइड ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि, सभी चालक दल सुरक्षित हैं। क्षेत्र में तनाव के बीच लगभग 2000 जहाज फंसे हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने दावा किया है कि उसके दो फ्लैग वाले व्यापारी जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ये जहाज ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ मिशन के तहत सुरक्षित रास्ते से निकाले गए और अब अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर इस ऑपरेशन में तैनात हैं, जो जहाजों को सुरक्षा दे रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि वह व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
ट्रंप के प्रोजेक्ट अभियान का उद्देश्य जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 2,000 व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना है। ट्रंप ने इसे एक "मानवीय कदम" बताया है क्योंकि जहाजों पर फंसे लगभग 20,000 नाविकों के पास भोजन और रसद की भारी कमी हो गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान में "गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (विनाशक युद्धपोत), जमीन और समुद्र आधारित 100 से अधिक विमान और मल्टी-डोमेन मानवरहित प्लेटफॉर्म (ड्रोन आदि) शामिल होंगे।
हालांकि, ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया है। ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी विदेशी सैन्य बल, विशेष रूप से "आक्रमणकारी अमेरिकी सेना" के प्रवेश पर हमला किया जाएगा।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है। ईरान ने 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने 'अस्वीकार्य' बताते हुए खारिज कर दिया है। जवाब में अमेरिका ने एक 9 सूत्रीय काउंटर-प्रस्ताव भेजा है, जिसे वर्तमान में तेहरान में समीक्षाधीन बताया जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि प्राथमिकता युद्ध को पूरी तरह से रोकना है, लेकिन अमरीका को अपनी "अत्यधिक मांगों" को छोड़ना होगा। अमेरिका की मुख्य मांग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करना और जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही है।
Updated on:
05 May 2026 05:30 am
Published on:
05 May 2026 05:30 am
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