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US-Iran Talks: यदि अमेरिका युद्ध लड़ना चाहता है, तो हम भी पीछे नहीं हटेंगे, ईरान ने दी चेतावनी

Geopolitics: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद शांति वार्ता टूटने के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल छा गए हैं। ट्रंप सरकार ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का आदेश दिया है, जिस पर ईरान ने करारा जवाब दिया है।
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भारत

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MI Zahir

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Updated: 7 May 2026, 2:14 PM IST

Iran new Supreme Leader Mojtaba Khamenei, Abbas Araghchi supports Mojtaba Khamenei, Iran third Supreme Leader Mojtaba Khamenei news,

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Photo-ANI)

Defiance : मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका और ईरान की उच्च स्तरीय वार्ता अचानक टूट गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह बात साफ की कि दोनों देश एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके थे, लेकिन अमेरिकी पक्ष की नई शर्तों और अड़ियल रवैये ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। ईरान का आरोप है कि उनकी टीम पूरी ईमानदारी और सद्भावना के साथ मेज पर बैठी थी। अराघची के अनुसार, वार्ता विफल होने का मुख्य कारण अमेरिका का बार-बार अपने लक्ष्यों को बदलना और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने की धमकी देना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में लिखा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में सबसे बड़े कूटनीतिक प्रयास किए थे, लेकिन अमेरिका ने इसके जवाब में तानाशाही दिखाई। अराघची ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका दुश्मनी का रास्ता चुनेगा, तो उसे ईरान की ओर से भी वैसा ही जवाब मिलेगा।

डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा फैसला: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी

शांति वार्ता विफल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े एक्शन का आदेश दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की है कि ईरान के सभी बंदरगाहों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकेबंदी की जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच जाने वाले जहाजों को रास्ता दिया जाएगा, लेकिन इस फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है।

ईरान की जवाबी चेतावनी: 'पीछे नहीं हटेंगे'

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपनी टीम का बचाव करते हुए कहा कि यदि अमेरिका तानाशाही छोड़ दे, तो कूटनीति का रास्ता अभी भी खुला है। वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने सीधे तौर पर युद्ध की बात कही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी ईरान के हौसले नहीं तोड़ सकती। कलीबाफ ने तीखे लहजे में कहा, "यदि अमेरिका युद्ध लड़ना चाहता है, तो ईरान भी पीछे हटने वाला नहीं है।" वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद वार्ता का टूटना केवल दो देशों की विफलता नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट की ओर धकेल सकता है। कूटनीति के बजाय सैन्य नाकेबंदी का रास्ता चुनना युद्ध की चिंगारी को हवा देने जैसा है।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं

अगले कुछ घंटों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई जा सकती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक-तिहाई तेल व्यापार गुजरता है। इस तनाव का सीधा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ेगा जो खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करते हैं। यदि नाकेबंदी लंबे समय तक चलती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।