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अमेरिका ने बंदरगाहों की नाकाबंदी के बाद ईरान को दे डाली खुली धमकी- ‘गलती की तो ऐसा हाल करूंगा…

Pentagon: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार चरम पर है। जहां अमेरिका दमनकारी शतेंं लागू करने पर ​तुला है तो ईरान अपने स्वाभिमान के नाम पर किसी भी कीमत पर झुकने के मूड में नहीं है। इस वजह से दोनों देशों में ठनी हुई है। अमेरिका ने गुरुवार को कहा है कि उसने पश्चिम […]

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भारत

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MI Zahir

Apr 16, 2026

US-Iran Conflict

पेंटागन में ईरान युद्ध पर एक ब्रीफिंग के दौरान मौजूद ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन। (फोटो: ANI )

Pentagon: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार चरम पर है। जहां अमेरिका दमनकारी शतेंं लागू करने पर ​तुला है तो ईरान अपने स्वाभिमान के नाम पर किसी भी कीमत पर झुकने के मूड में नहीं है। इस वजह से दोनों देशों में ठनी हुई है। अमेरिका ने गुरुवार को कहा है कि उसने पश्चिम एशिया में ईरान के बंदरगाहों और समुद्री तटों की सख्त नाकाबंदी कर दी है। अमेरिकी वायु सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने साफ किया कि यह नाकाबंदी होर्मुज जलडमरूमध्य की नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर ईरान के प्रादेशिक और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लागू की गई है।

किसी भी देश के जहाज को नहीं मिलेगी छूट

जनरल डैन केन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह नाकाबंदी ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से आने वाले सभी जहाजों पर लागू होगी, चाहे वे किसी भी देश के क्यों न हों। अमेरिका और उसकी मित्र सेनाएं ऐसे किसी भी जहाज को रोकेंगी जो ईरान का झंडा लगाए हुए है या ईरान को किसी भी तरह की मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

अवैध तेल ले जाने वाले 'गुप्त बेड़े' की खैर नहीं

ध्यान रहे कि इस अभियान का एक बड़ा लक्ष्य ईरान का 'गुप्त बेड़ा' (Ghost fleet) है। ये वो अवैध जहाज हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों और प्रतिबंधों से बच कर ईरान का तेल ले जाते हैं। अमेरिका ने प्रशांत महासागर क्षेत्र में भी ऐसे जहाजों का पीछा करना शुरू कर दिया है, जो नाकाबंदी लागू होने से पहले वहां से निकल गए थे। इस बड़े मिशन के लिए अमेरिका के 10,000 से अधिक सैनिक, दर्जनों विमान और कई युद्धपोत तैनात किए गए हैं। अमेरिकी सेना किसी भी पल बड़े युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।

'हम अपनी 10 फीसदी ताकत का भी इस्तेमाल नहीं कर रहे'

अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता का मजाक उड़ाते हुए कहा, "ईरान भले ही यह सोचता हो कि उसका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है, लेकिन असलियत में उसके पास न तो कोई मजबूत नौसेना है और न ही इलाके की सही जानकारी। हम अमेरिका की 10 प्रतिशत से भी कम नौसैनिक ताकत के साथ यह नाकाबंदी चला रहे हैं।" हेगसेथ ने आगे कहा कि व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले की धमकी देना सीधे तौर पर समुद्री डकैती और आतंकवाद है।

शांति चुनें या तबाही के लिए तैयार रहें: अमेरिका

युद्ध सचिव हेगसेथ ने ईरान को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि उसके पास अभी भी सीजफायर के माध्यम से शांति का रास्ता चुनने का मौका है। उन्होंने कहा, "ईरान के नेता अपने लोगों के सुनहरे भविष्य के लिए सही फैसला लें। जब तक जरूरी होगा, तब तक हम यह नाकाबंदी जारी रखेंगे। लेकिन अगर ईरान ने कोई गलत कदम उठाया, तो उसे नाकाबंदी के साथ-साथ अपने बुनियादी ढांचे, बिजली और ऊर्जा संयंत्रों पर भारी बमबारी का सामना करना पड़ेगा।"

ईरान ने भी किया पलटवार

अमेरिका की इस आक्रामक कार्रवाई और बयानों पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी नौसेना ने ईरान के लिए कोई सीधा खतरा पैदा किया, तो इस्लामिक रिपब्लिक की सेना माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ( इनपुट: ANI )