
पाकिस्तानी फाइटर जेट (फोटो- एएनआई)
ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच फिलहाल युद्धविराम लागू है। इस बीच, पाकिस्तान ने मिडिल ईस्ट में अचानक अपना फाइटर जेट भेज दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थता करने का दावा करता है, उसने अब अपना फाइटर जेट मिडिल ईस्ट में क्यों भेजा है? ताजा गतिविधि से महायुद्ध की भी अटकलें तेज हो गईं हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने फाइटर जेट भेजने की वजह भी खुलकर बताई है। जिससे साफ होता है कि जिस मकसद से जेट भेजे गए हैं, उस काम में थोड़ी भी गड़बड़ी हुई तो बात बिगड़ सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं। ऐसे में अगर किसी भी कारण से हालात बिगड़ते है तो पाकिस्तान पर इसकी जिम्मेदारी आएगी। इस तरह के हालातों से बचने के लिए पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर एयर ऑपरेशन शुरू कर दिया है, जिसमें फाइटर जेट, AWACS और टैंकर विमान शामिल हैं।
पाकिस्तान वायु सेना ने एक व्यापक एयर सिक्योरिटी मिशन के तहत JF-17 थंडर और F-16 जैसे आधुनिक फाइटर जेट मिडिल ईस्ट में तैनात किए हैं। ये विमान ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र के आसपास देखे गए हैं और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को इस्लामाबाद तक एस्कॉर्ट करने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके अलावा IL-78 रिफ्यूलिंग टैंकर और C-130 हरक्यूलिस जैसे सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी तैनात किए गए हैं, जिससे लंबी दूरी तक ऑपरेशन संभव हो सके।
AWACS सिस्टम, जिसे आसमान की आंखें कहा जाता है, लगातार पूरे एयरस्पेस पर नजर रख रहा है। यह तैनाती सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि यूएई और सऊदी अरब के आसमान में भी पाकिस्तानी विमानों की गतिविधि देखी गई है, जो क्षेत्रीय सहयोग का संकेत देती है। पाकिस्तान ने शांति वार्ता को सफल बनाने के लिए राजधानी इस्लामाबाद में भी सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। शहर के कई हिस्सों को सील कर दिया गया है और एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया गया है। पाकिस्तानी मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों को पूरी तरह सुरक्षित माहौल देने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शामिल होने की संभावना है। यदि यह वार्ता होती है, तो यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय मुलाकात होगी। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल भी मंडरा रहे हैं। लेबनान को लेकर संघर्षविराम की शर्तों पर मतभेद सामने आए हैं। ईरान और पाकिस्तान का दावा है कि समझौते में लेबनान पर हमले रोकना शामिल था, जबकि अमेरिका और इजरायल इससे इनकार कर रहे हैं।
इसी बीच इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर तेज हवाई हमले किए, जिसमें 24 घंटे में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस स्थिति ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि लेबनान में जारी हमलों ने वार्ता को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
Published on:
10 Apr 2026 03:12 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
US Israel Iran War
