
डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- एएनआई)
US-Iran-War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हालिया घटनाओं ने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर डाला है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया है कि ईरान ने उन्हें अपना अगला सुप्रीम लीडर बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।
रिपब्लिकन फंडरेजर में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेताओं ने अनौपचारिक रूप से उन्हें सुप्रीम लीडर बनने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने इस दावे को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने साफ तौर पर इसे अस्वीकार कर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के शीर्ष नेतृत्व में कथित रूप से अस्थिरता बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया, लेकिन अभी तक उनकी सार्वजनिक उपस्थिति नहीं हुई है।
ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को मिलिट्री डेसिमेशन बताया और दावा किया कि अमेरिका इस संघर्ष में बड़ी जीत हासिल कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान गुप्त रूप से बातचीत करना चाहता है, लेकिन आंतरिक दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ रहा। अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान को 15 बिंदुओं वाला सीजफायर प्रस्ताव भेजा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे हिजबुल्लाह को समर्थन बंद करने की मांग शामिल है। इसके अलावा होर्मुज स्टेट को फिर से खोलने की शर्त भी रखी गई है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के जरिए भेजा गया बताया जा रहा है।
ट्रंप का कहना है कि ईरान समझौते के लिए तैयार है, लेकिन उसे अपने ही लोगों से खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान को अमेरिका से भी डर है, जिससे वह खुलकर बातचीत नहीं कर पा रहा। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने अमेरिका के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। देश के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाकारी ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान कभी भी अमेरिका के साथ समझौता नहीं करेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या ट्रंप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेहरान ने पांच बिंदुओं वाला अपना प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें साफ किया गया है कि किसी भी समझौते की शर्तें वही तय करेगा। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच मतभेद गहरे हैं और फिलहाल समाधान की संभावना कम दिख रही है।
Updated on:
26 Mar 2026 11:46 am
Published on:
26 Mar 2026 11:45 am
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