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अमेरिकी राज्य अलाबामा ने सज़ा-ए-मौत के लिए किया नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल, देश में पहली बार हुआ ऐसा

New Execution Method In USA: अमेरिका में सज़ा-ए-मौत के लिए एक बिल्कुल ही अलग तरीके का इस्तेमाल किया गया है। यह काम हाल ही में पहली बार अलाबामा राज्य में हुआ।

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NItrogen Gas Execution

सज़ा-ए-मौत का चलन अब पहले जितना नहीं है, पर अभी भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि मौत की सज़ा गंभीर मामलों में ही दी जाती है। कुछ मुस्लिम देशों में सज़ा-ए-मौत सामान्य है, पर दूसरे देशों में इसका काफी कम इस्तेमाल किया जाता है। पर हाल ही में अमेरिका (United States Of America) में मौत की सज़ा दी गई। हालांकि सज़ा-ए-मौत के लिए अमेरिका में फांसी का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस मामले में मौत की सज़ा के लिए अमेरिका में कुछ ऐसा किया गया जो देश में पहले कभी नहीं किया गया था। नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल।


नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हुए दी गई सज़ा-ए-मौत

अमेरिका में पहली बार नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हुए सज़ा-ए-मौत दी गई। अमेरिका में गुरुवार रात का इस काम को अंजाम दिया गया।

अलाबामा बना ऐसा करने वाला पहला राज्य

नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हुए सज़ा-ए-मौत देने का काम अमेरिका में पहली बार अलाबामा (Alabama) राज्य में हुआ।


नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हुए किसे दी गई सज़ा-ए-मौत?

नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हुए कैनेथ यूजीन स्मिथ (Kenneth Eugene Smith) नाम के शख्स को सज़ा-ए-मौत दी गई। 58 वर्षीय कैनेथ ने 18 मार्च, 1988 ने एलिज़ाबेथ सैनेट (Elizabeth Sennett) नाम की महिला का उसके पति के कहने पर क़त्ल कर दिया था। इस काम में कैनेथ का साथ जॉन फॉरेस्ट पार्कर (John Forrest Parker) नाम के शख्स ने दिया था, जिसे 2010 में जहरीला इंजेक्शन देकर मौत की सज़ा दे दी गई थी। कैनेथ 1996 से सज़ा-ए-मौत पर चल रहा था और अब उसे मौत की सज़ा दे दी गई है।

फेफड़ों में भरी गई नाइट्रोजन गैस

कैनेथ को नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हुए सज़ा-ए-मौत देने के लिए उसे मास्क पहनाया गया और फेफड़ों में नाइट्रोजन गैस भरी गई। उसे सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिली और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने से उसकी मौत हो गई।

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