
अमेरिका-वेनेजुएला टकराव। ( प्रतीकात्मक फोटो: AI)
Military Supremacy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में सफल सैन्य वर्चस्व( Military Supremacy) का दावा करते हुए एक सनसनीखेज खुलासा किया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि वेनेजुएला की अंतरिम अथॉरिटी अमेरिका को 50 मिलियन बैरल (5 करोड़ बैरल) उच्च गुणवत्ता वाला तेल (Trump Venezuela Oil Supply 2026) सौंपेगी। इस सौदे की कीमत लगभग 2.8 अरब डॉलर आंकी गई है। ट्रंप-केनेडी सेंटर में रिपब्लिकन सांसदों की बैठक (White House Oil Company Meeting) को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का दोनों देशों के लोगों के हित में उपयोग किया जाएगा। यह कदम निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी (Nicolas Maduro Capture Operation) के बाद वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी प्रभाव को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। यह घोषणा उस समय हुई है जब अमेरिका, वेनेजुएला के संघर्षरत तेल क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की योजना बना रहा है।
वेनेजुएला की राजधानी कराकस से आ रही खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए एक गुप्त अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान भारी हिंसा हुई। इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के कम से कम 24 सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं। अमेरिका का उद्देश्य मादुरो को हिरासत में लेकर उन पर मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) के आरोपों में मुकदमा चलाना है। हालांकि, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों की एक बैठक को संबोधित करते हुए मादुरो पर निजी और राजनीतिक दोनों तरह के हमले किए। ट्रंप ने मादुरो को एक "हिंसक व्यक्ति" करार देते हुए कहा कि उन्होंने लाखों लोगों की जान ली है। ट्रंप ने कटाक्ष करते हुए यहाँ तक कह दिया कि "मादुरो मेरे डांस मूव्स की नकल करने की कोशिश करता है।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने कराकस में "यातना केंद्रों" होने का आरोप लगाया और अमेरिका में मादुरो का समर्थन करने वालों को "कट्टर वामपंथी" बताया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी सेना की कार्रवाई मादुरो के अत्याचारों को खत्म करने के लिए जरूरी थी।
ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के तेल खजाने पर कब्जा जमाने और वहां का बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए सक्रिय हो गया है। बुधवार को मियामी में एक बड़ी कॉन्फ्रेंस के मद्देनजर अब शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक्सॉन (Exxon), शेवरॉन (Chevron) और कॉनोकोफिलिप्स (ConocoPhillips) जैसी दिग्गज अमेरिकी तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है। सरकार इन कंपनियों को वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है, हालांकि कंपनियां वहां की अस्थिरता को देखते हुए अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम "Oil for Peace" की नीति जैसा है, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप ने लैटिन अमेरिका में तनाव बढ़ा दिया है। मानवाधिकार संगठनों ने 24 सुरक्षाकर्मियों की मौत पर चिंता जताई है, वहीं अमेरिकी बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद से उपभोक्ता खुश नजर आ रहे हैं।
अगले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या निकोलस मादुरो वास्तव में अमेरिकी गिरफ्त में हैं या वे अभी भी सुरक्षित ठिकाने पर छिपे हैं। शुक्रवार को होने वाली तेल कंपनियों की बैठक यह तय करेगी कि क्या वेनेजुएला का तेल भंडार वास्तव में वैश्विक बाजार के लिए उपलब्ध हो पाएगा या यह केवल एक रणनीतिक बयानबाजी है।
बहरहाल, इस पूरी घटना का एक आर्थिक पहलू भी है। वेनेजुएला का तेल 'हैवी ग्रेड' का होता है, जिसे रिफाइन करना आसान नहीं है। अमेरिकी रिफाइनरियां इस तेल को संभालने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। यदि यह सप्लाई शुरू होती है, तो रूस और मध्य पूर्व के देशों पर अमेरिका की निर्भरता काफी कम हो सकती है, जो ग्लोबल राजनीति के समीकरण बदल देगा।
Updated on:
07 Jan 2026 07:02 pm
Published on:
07 Jan 2026 07:00 pm
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