
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो(फोटो-ANI)
Security Cooperation: अमेरिका, मध्य एशिया में 200 से अधिक अमेरिकी कंपनियों को ले जा रहा है। यह कदम एक बड़े राजनयिक और व्यावसायिक प्रयास का हिस्सा है, जो रूस और चीन की सीमाओं से लगे इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र पर केंद्रित है। इसके जरिए वाशिंगटन इन पांच देशों के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच और सुरक्षा सहयोग को गहरा करना चाहता है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद में इस पहल का नेतृत्व करेंगे। वहां वे 'C5 प्लस 1' राजनयिक ढांचे के तहत कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प प्रशासन इस क्षेत्र में अमेरिकी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिस पर पहले वाशिंगटन ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया था। इस दौरे में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी, बड़ी कंपनियां और मध्य एशियाई सरकारों के प्रतिनिधि एक साथ आएंगे, ताकि निवेश के अवसरों को तलाशा जा सके और आर्थिक सहयोग को गहरा किया जा सके।
स्टेट डिपार्टमेंट की एक ब्रीफिंग के दौरान अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "यहां सिर्फ द्विपक्षीय बैठकें या 'C5 प्लस 1' बैठक ही नहीं होगी। हम अपने साथ 200 से अधिक अमेरिकी कंपनियों को भी ला रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में विमानन और बैंकिंग से लेकर परिवहन और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि प्रशासन के व्यावसायिक कूटनीति प्रयासों से जुड़ी कंपनियों में बोइंग, सिटीबैंक और फ्रैंकलिन टेम्पलटन शामिल हैं।
इन बैठकों में 'यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन', 'एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक', 'नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' और 'स्टेट डिपार्टमेंट' के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन का लक्ष्य अमेरिकी व्यवसायों को मध्य एशिया की कंपनियों और सरकारों के साथ जोड़ना है, ताकि निवेश और व्यावसायिक साझेदारी में तेजी लाई जा सके। अधिकारी ने इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रशासन ने मध्य एशियाई नेताओं के साथ अपने जुड़ाव को काफी बढ़ाया है।
पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में मध्य एशिया के पांचों राष्ट्रपतियों की मेजबानी की थी। अधिकारी ने इस पहल को इस क्षेत्र के साथ अमेरिका के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
अधिकारी ने कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान को G20 में पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में आमंत्रित किए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि यह उनके बढ़ते अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव का एक और संकेत है।
Updated on:
16 Oct 2026 08:13 pm
Published on:
16 Oct 2026 07:58 pm
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