26 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

क्यों समझौते पर उतरे ट्रंप? कहां अमेरिका पर भारी पड़ रहा ईरान? भारत के पूर्व सैन्य अधिकारी ने बताई INSIDE STORY

ईरान युद्ध चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। इस बीच, सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी.डी. बख्शी ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका इस युद्ध में बुरी तरह फंस गया है। पहले कमजोर दिख रहा ईरान अब अच्छे पत्ते खेल रहा है और अमेरिका पर भारी पड़ रहा है।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Mar 26, 2026

US President Donald Trump has issued a formidable warning to Tehran, asserting that any efforts to impede the transit of petroleum through the Strait of Hormuz will be met with a massive military retaliation.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (Photo - IANS)

ईरान युद्ध अब चौथे सप्ताह में पहुंच गया है। इस बीच, यह खबर सामने आई है कि अमेरिका पर ईरान इस वक्त भारी पड़ रहा है। भारत के मेजर जनरल जी डी बख्शी (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका इस युद्ध में बुरी तरह फंस गया है। उन्होंने कहा कि जो ईरान पहले कमजोर स्थिति में था, अब वह अपने पत्ते अच्छे से खेल रहा है।

खबर यह भी है कि ईरान ने अमेरिका की 15-सूत्रीय योजना को खारिज कर दिया है। इस बीच, मेजर जनरल बख्शी ने आइएएनएस से ​​कहा- अमेरिका अभी बुरी तरह फंसा हुआ है और जब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है, दुनिया को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

क्यों ईरान पर पड़ रहा भारी?

जब सैन्य अधिकारी से पूछा गया कि मौजूदा युद्ध की स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने पांच दिनों के लिए संघर्ष विराम का आह्वान किया है। पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15-सूत्रीय योजना दी गई थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया। आपको क्या लगता है कि अभी अमेरिका की स्थिति क्या है?

इस पर जीडी बख्शी ने जवाब दिया कि अमेरिका अभी बुरी तरह फंसा हुआ है। उन्होंने बाहर निकलने का रास्ता खोजने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।

उन्होंने आगे कहा- ईरान कह रहा है- हो सकता है तुम खत्म हो जाओ, मैं नहीं। ईरान अमेरिका से कह रहा है कि युद्ध तुमने शुरू किया है, यह तुम्हारी अपनी पसंद का युद्ध है। तुमने (अमेरिका ने) हमारे (ईरान के) अयातुल्ला (सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई) को बिना किसी कारण के मार डाला और जीत की घोषणा भी कर दी।

युद्ध को 27 दिन पूरे

बख्शी ने आगे कहा- युद्ध को 27 दिन हो चुके हैं। जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग छेड़ते हैं, उनका इरादा संघर्ष विराम का भी होता है। यदि उनकी सेना दूर तैनात है और उसे पहुंचने में समय लगता है, तो वे उस दौरान (संघर्ष विराम के समय) बातचीत शुरू कर देते हैं। फिर वे बातचीत के दौरान हमला करके पीठ में छुरा घोंपते हैं।

अमेरिका की चाल समझ गया है ईरान

सैन्य अधिकारी ने कहा कि ट्रंप ने पिछले साल जून में ऐसा किया था और अब इस साल की शुरुआत में भी ऐसा किया है। अब ईरान भी उनकी चालों को समझ गया है।

उधर, पाकिस्तान को लगता है कि वह ट्रंप की धोखे की योजना को लागू करने में मदद करेगा ताकि ईरान को धोखा दिया जा सके और उस पर हमला किया जा सके। ईरान समझ गया है कि हर बार उन्हें धोखा दिया जा रहा है। शांति के लिए कोई ईमानदारी नहीं है।

ईरान ने पांच शर्तें रखीं

बख्शी ने आगे कहा- अब अमेरिका फंस गया है। ईरान ने भी पांच शर्तें रखी हैं। यूक्रेन में चल रहे युद्ध का दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा था, लेकिन इस युद्ध का पड़ रहा है। जिन देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, वे हैं भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और एशिया तथा यूरोप के दूसरे देश। अमेरिका में भी पेट्रोल और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए हैं।

ईरान में जमीन पर सेना उतारने से क्या होगा

वहीं, जब बख्शी से पूछा गया कि खबरें आ रही हैं कि ईरान में जमीन पर सेना उतारने की तैयारियां चल रही हैं। अफगानिस्तान में जो कुछ हुआ, उसके बाद क्या अमेरिका के लिए ईरान में जमीन पर सेना उतारना सही कदम होगा?

इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। अभी भी, मैं अमेरिका से यही गुजारिश करूंगा कि वह बातचीत का रास्ता अपनाए और अपनी इज्जत बचाए रखे। अगर वे जमीन पर सेना उतारने का कदम उठाते हैं, तो तेल की कीमतें बढ़कर 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएंगी।

बेवकूफ बना सकता है अमेरिका

बख्शी ने आगे कहा कि अभी वे (अमेरिका) 'छलावे' के जरिए तेल की कीमतें कम करने और शेयर बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कोई कब तक लोगों को बेवकूफ बना सकता है? जमीन पर सेना उतारने की बात करें, तो वे फौजी तौर पर क्या कर सकते हैं?

उन्होंने कहा कि अगर वे होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलना चाहते हैं, तो ईरान की नौसेना असली समस्या नहीं है। असली समस्या बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, जहाज-रोधी मिसाइलें और ड्रोन हैं। तेल से भरे किसी टैंकर को तबाह करने के लिए एक या दो ड्रोन ही काफी हैं।