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म्यूनिख/शिनजियांग। उइगर अधिकार समूह, वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) को शांति, लोकतंत्र के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। उइगर कांग्रेस को चीन में उइगर और दूसरे तुर्की मूल के लोगों की दुर्दशा दिखाने और उनकी शांति के लिए काम करने के लिए नामांकित किया गया है। नामांकन पत्र में उइगरों की स्थिति के लिए 'चीन के दमनकारी शासन' को जिम्मेदार बताया गया है। उइगर संगठन को नामांकित किए जाने के बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
कनाडा और नार्वे के राजनेताओं ने किया नामांकन
कनाडा के दो सांसदों और नॉर्वे में युवा उदारवादियों के एक नेता और नॉर्वे के वेंस्ट्रे राजनीतिक दल के युवा विंग ने डब्ल्यूयूसी संगठन को नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया है। नामांकन पत्र में कहा गया है कि. वर्ल्ड उइगर कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य अपने लोगों के लिए लोकतंत्र, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और स्व-निर्णय का अधिकार हासिल करने के लिए शांतिपूर्ण, अहिंसक और लोकतांत्रिक साधनों के उपयोग का समर्थन करना है। समूह को नामित करने वाले दो कनाडाई संसद सदस्यों में से एक एलेक्सिस ब्रुनेल-डुसेप ने खुद मीडिया के सामने ये जानकारी साझा की है।
दुनिया के सामने उजागर की चीनी शासन की क्रूरता
नामांकन पत्र में ये भी उल्लेख किया गया है कि डब्ल्यूयूसी ने चीनी सरकार द्वारा किए जा रहे शारीरिक, धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक दमन के के खिलाफ दुनिया का ध्यान खींचा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डब्ल्यूयूसी ने चीनी सरकार द्वारा मुस्लिमों को गायब किए जाने, राजनीतिक कैदियों की जेल से रिहाई और उनके अधिकारों के लिए सशक्त अभियान चलाकर उइगरों की बात को दुनिया के मंच पर रखा है। ब्रुनेले-डुसेप ने नामांकन पत्र में लिखा है, कि उइगर कांग्रेस के अभियान की वजह से ही संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ को पता चल पाया कि चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ अत्याचार किस हद तक बढ़ गया है।
उइगर कांग्रेस के आतंकवादी संगठनों से संबंधः चीन
वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उइगर कांग्रेस के नामांकन की आलोचना की है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने एक ईमेल में वॉइस ऑफ अमरीका को लिखा है कि तथाकथित 'वर्ल्ड उइगर कांग्रेस' के आतंकवादी संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस तरह के संगठन को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जाना विश्व शांति के लिए बेहद हानिकारक है और नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर बड़ी विडंबना है। उम्मीद है कि नोबेल पुरस्कार वैश्विक शांति की दिशा में योगदान देगा, ना कि ये एक राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने का उपकरण बन जाएगा।
चीन में उइगरों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघनः संयुक्त राष्ट्र
पिछले साल संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने भी चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के खिलाफ 'मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन' पर एक रिपोर्ट जारी की थी।
20 लाख कैंपों में, भागने पर गोली मारने के आदेश
सैद्धांतिक तौर पर
शिनजियांग क्षेत्र भी तिब्बत की तरह स्वायत्त है, यानी इसमें स्वशासन की कुछ शक्तियां हैं। चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित इस बड़े भौगोलिक क्षेत्र का नाम आधिकारिक रूप से शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र (एक्सयूएआर) ही है।
लेकिन व्यवहार में, दोनों क्षेत्रों में केंद्र सरकार द्वारा भारी प्रतिबंधों के तहत बड़े पैमाने पर
मानवाधिकारों का दमन किया जा रहा है। माना जाता है कि करीब 20 लाख उइगरों (उइगर आबादी का छठवें हिस्से) को उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में लेकर चीन के कुख्यात कैंपों में रखा गया है। इन कैंपों को चीन पुनः शिक्षा शिविर कहता है। हजारों-हजार उइगरों को जेल की सजा सुनाई गई है। इन कैंपों से भागने वालों के लिए देखते ही गोली मारने के आदेश सशस्त्र बलों को दिए गए हैं।
शिनजियांग नहीं पूर्वी तुर्किस्तान
उइगर लोग इस प्रांत को शिनजियांग के बजाय पूर्वी तुर्किस्तान कहना पसंद करते हैं। चीनी भाषा में शिनजियांग का अर्थ है नया क्षेत्र। शिनजियांग में रहने वाले वाले करीब 1 करोड़ 30 लाख उइगरों में ज्यादातर मुस्लिम हैं। उइगर अपनी भाषा बोलते हैं, जो तुर्की के समान ही है, और खुद को सांस्कृतिक और जातीय रूप से मध्य एशियाई देशों का करीबी मानते हैं। वे शिनजियांग की आबादी के आधे से भी कम हैं।
इस तरह हुआ था उइगर कांग्रेस का गठन
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की स्थापना 2004 में, जर्मनी के म्यूनिख में, पूर्वी तुर्किस्तान राष्ट्रीय कांग्रेस और विश्व उइगर युवा कांग्रेस के एक संगठन में विलय के बाद हुई थी।
Updated on:
13 Mar 2023 07:33 am
Published on:
12 Mar 2023 11:02 pm
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