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रूस-अमेरिका के बीच परमाणु संधि खत्म, दुनिया भर में मच गई हलचल, पोप ने की रिन्युअल की अपील

रूस और अमेरिका के बीच परमाणु संधि खत्म हो गई है। पोप ने दोनों देशों से इसे रिन्युअल की अपील की है। ट्रीटी खत्म होने से दुनिया भर में हलचल मच गई है।

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अमेरिका के राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। फोटो- IANS

रूस और अमेरिका के बीच आखिरी न्यूक्लियर वेपन कंट्रोल ट्रीटी आज खत्म हो गई। इससे हथियारों की नई रेस का डर बढ़ गया है। स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी 'न्यू स्टार्ट' को 2010 में साइन हुए थे। इस एग्रीमेंट में खतरनाक परमाणु युद्ध को रोकने के लिए बनाए गए थे। इस संधि के चलते दोनों देशों ने स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वॉरहेड्स की संख्या को 1,550 तक लिमिट कर दिया था। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, नोटिफिकेशन और साइट पर इंस्पेक्शन सहित कुछ ट्रांसपेरेंसी भी बनाई गई थी।

पोप ने की ट्रीटी को रिन्युअल करने की अपील

इस ट्रीटी की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पोप ने भी ट्रीटी को रिन्युअल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हथियारों की रेस को रोकरे के लिए हर मुमकिन प्रयास किए जाने चाहिए। दरअसल, स्ट्राट ट्रीटी पर साल 1991 में सोवियत संघ और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने साइन किया था। इस ट्रीटी के तहत दोनों देशों ने 6 हजार से अधिक न्यूक्लियर वारहेड डिप्लाई न करने पर सहमति जताई थी। सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस और अमेरिका के बीच साल 2010 में दोबारा न्यू स्टार्ट ट्रीटी पर साइन किए थे। हालांकि, यूक्रेन संग जंग छिड़ने के बाद रूस ने तीन साल पहले इस ट्रीटी को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन माना जाता था कि दोनों देश परोक्ष रूप से इस ट्रीटी का पालन कर रहे हैं। सामरिक मामलों के जानकारों ने कहा कि इस समझौते ने दोनों देशों को न्यूक्लियर हथियारों को जमा करने से रोका। साथ ही, दोनों देशों को एक-दूसरे के इरादों का गलत अंदाजा लगाने से बचने के लिए पारदर्शी तरीके दिए।

इस ट्रीटी में क्या क्या शामिल था

इस ट्रीटी में इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज एग्रीमेंट भी शामिल था। जिसने यूरोप के अंदर कम दूरी के न्यूक्लियर हथियारों की तैनाती को काफी हद तक खत्म कर दिया। वहीं, ओपन स्काइज ट्रीटी में रूस और अमेरिका समेत हस्ताक्षर करने वाले देशों में सेना पर नजर रखने के लिए एक दूसरे के इलाके में बिना हथियारों के जासूसी उड़ानें भरने की इजाजत दी। यूरोप में कन्वेंशनल आर्म्ड फोर्सेज ट्रीटी ने रूस और नाटो दोनों सेनाओं के टैंकों, सैनिकों और आर्टिलरी सिस्टम की संख्या को यूरोप के अंदर तैनात करने की लिमिट तय कर दी। स्टार्ट ट्रीटी के खत्म होने पर ब्रिटेन सेना के पूर्व अधिकारी एडमिरल सर टोनी राडाकिन ने चेतावनी दी कि दुनिया को सुरक्षित रखने वाला फ्रेमवर्क अब टूट रहा है।

साल 2010 में स्टार्ट ट्रीटी पर रूस की तरफ से हस्ताक्षर करने वाले और वर्तमान में रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि ट्रीटी के खत्म होने पर सभी को डरना चाहिए। वहीं, क्रेमलिन की तरफ से कहा गया कि अगर यह ट्रीटी खत्म हो जाती है तो रूस नपे-तुले और जिम्मेदारी पूर्वक काम करेगा। क्रेमलिन ने आगे कहा कि वह अपने अगले कदम चुनने के लिए स्वतंत्र है।

ट्रीटी खत्म होने पर आया ट्रंप का बयान

स्टार्ट ट्रीटी के खत्म होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी बयान आया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर स्टार्ट ट्रीटी खत्म होता है तो हम एक बेहतर समझौता करेंगे। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन का मानना ​​है कि भविष्य की किसी भी आर्म्स कंट्रोल ट्रीटी में चीन को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो अपने न्यूक्लियर हथियारों का जखीरा बना रहा है। वहीं, रूस ने कहा कि भविष्य की किसी भी आर्म्स कंट्रोल ट्रीटी में फ्रांस और यूके को भी शामिल किया जाना चाहिए।