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गिरफ्तारी के बाद दूसरी बार सार्वजनिक तौर पर नजर आए मादुरो, न्यूयॉर्क की कोर्ट में हुए पेश

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वह दूसरी बार सार्वजनिक तौर पर नजर आए है। मादूरो न्यूयॉर्क की अदालत में पेश हुए थे।

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भारत

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Himadri Joshi

Mar 27, 2026

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न्यूयॉर्क कोर्ट के बाहर (फोटो- आईएएनएस)

वेनेजुएला और अमेरिका के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इस तनाव ने जनवरी 2026 में बड़ा मोड़ लिया जब अमेरिकी सेना ने अचानक कार्रवाई की। इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया, जहां अब उनका मुकदमा चल रहा है। गिरफ्तारी के बाद अब मादुरो दुसरी बार सार्वजनिक रूप से नजर आए। वह हाल ही में न्यूयॉर्क की अदालत में पेश हुए थे, जहां उनके वकीलों ने आरोपों को खारिज करने की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गंभीर बहस और विरोध को जन्म दिया है।

मादुरो पर ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्को टेररिज्म के आरोप

जनवरी 2026 में अमेरिका ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के तहत काराकस में छापा मारकर मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। मादुरो पर ड्रग ट्रैफिकिंग और नार्को टेररिज्म जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा थी। हालांकि, इस ऑपरेशन को लेकर कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। लैटिन अमेरिका के कई नेताओं ने इसे संप्रभुता पर हमला कहा, जबकि कुछ देशों ने इसे न्याय की दिशा में कदम बताया।

जज ने केस खारिज करने से किया इनकार

5 जनवरी को पहली पेशी के दौरान मादुरो ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए खुद को अब भी राष्ट्रपति बताया। दूसरी पेशी में उनके वकीलों ने अदालत से केस खारिज करने की मांग की। उनका तर्क है कि मादुरो को अपहरण करके अमेरिका लाया गया, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। वकीलों ने यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार वेनेजुएला के सरकारी फंड का उपयोग उनकी कानूनी फीस के लिए करने से रोक रही है। हालांकि जज ने इन तर्कों पर संदेह जताते हुए केस खारिज करने से इनकार कर दिया।

वैश्विक राजनीति में बढ़ा तनाव

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। न्यूयॉर्क कोर्ट के बाहर प्रदर्शनकारियों ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। कई लोगों का कहना है कि अमेरिका को किसी अन्य देश के निर्वाचित नेता को इस तरह पकड़ने का अधिकार नहीं है। वहीं, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की वैश्विक रणनीति और संसाधनों पर नियंत्रण से जुड़ा हो सकता है। इस घटना ने वैश्विक राजनीति में नए तनाव को जन्म दिया है और कई देशों को अमेरिकी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।