
अमेरिकी सेना की 82nd एयरबोर्न डिवीजन (Photo Credit - US Army)
Iran Israel War : पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी युद्ध के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग बड़ी योजना बना रहा है। अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सरकार 10 हजार अतिरिक्त ग्राउंड ट्रूप्स भेजने की कोशिश में है। अखबार के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह फैसला तेहरान के साथ शांतिवार्ता के दौरान दवाब बनाने के लिए ले सकते हैं। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका खार्ग व अन्य द्वीपों पर कब्जा करके ईरान को अपनी शर्तों पर युद्ध खत्म करने के लिए मनवा सकता है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध सैन्य रूप से पहले ही जीत लिया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों ने तेहरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान ने अमेरिकी हमलों पर सात दिन का विराम मांगा था, लेकिन उन्होंने इसे बढ़ाकर 10 दिन कर दिया है। नई समय सीमा 6 अप्रैल तक तय की गई है। ट्रंप ने कहा कि वे मेरे लोगों के माध्यम से बहुत विनम्रता से कह रहे थे कि क्या हमें और समय मिल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत अच्छी चल रही है और ईरान को गंभीर होना चाहिए। हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मध्यस्थों का हवाला देते हुए रिपोर्ट किया कि ईरान ने ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों में विराम की कोई मांग नहीं की है। उन्होंने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
दरअसल, हमले की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई सीनियर ईरानी कमांडर मारे गए। ईरान ने इसके जवाब में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉकेड की स्थिति पैदा कर दी। इससे वैश्विक स्तर पर तेल के दामों में जबरदस्त उछाल आया।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके ऊर्जा क्षेत्र पर हमला करता है, तो वह क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे, जिसमें डेसालिनेशन प्लांट्स शामिल हैं, पर जवाबी हमला करेगा। ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर हार्मुज जलडमरूमध्य खुला नहीं रखा गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा प्लांट्स को निशाना बनाएगा। अब 10 दिन का विराम देकर उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा देने की कोशिश की है, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास जारी है।
इस बीच, ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होटल मालिकों को अल्टीमेटम जारी किया है। सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अगर ये होटल अमेरिकी सैनिकों को ठहरने देते हैं, तो उनकी संपत्तियां वैध सैन्य लक्ष्य बन सकती हैं।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक अपने ठिकानों से भागकर होटलों और सिविलियन जगहों में छिप रहे हैं। वे स्थानीय नागरिकों को मानवीय ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैनिक खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के होटलों में शरण ले रहे हैं।
फार्स ने दावा किया कि ईरानी मिसाइल हमलों और सहयोगी मिलिशिया समूहों के संयुक्त अभियानों के बाद अमेरिकी बल सिविलियन स्थानों पर जा रहे हैं, जिसमें बेरूत के पुराने एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक्स बेस और दमिश्क के फोर सीजन्स व शेराटन होटल शामिल हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी सुविधा जो विदेशी सैन्य कर्मियों को आश्रय देगी, वह तुरंत सैन्य लक्ष्य बन जाएगी। अराघची ने अमेरिका में होटलों की तुलना की, जहां वे सुरक्षा कारणों से सैन्य अधिकारियों को बुकिंग से इनकार करते हैं, और खाड़ी देशों के होटलों से भी यही अपेक्षा की।
Updated on:
27 Mar 2026 08:32 am
Published on:
27 Mar 2026 08:26 am
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