
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
Vladimir Putin calls Iranian President:इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को फोन किया। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों में मदद करने और मध्यस्थता के लिए तैयार हैं।
क्रेमलिन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन ने अपने समकक्ष ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को इच्छुक है।
इधर, ओमान के विदेश मंत्री बदर बिन हमद अल बुसैदी ने ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की वकालत की है। उन्होंने पोप लियो के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा कि युद्ध शुरू होने से कुछ घंटे पहले जब मेरी मुलाकात उपराष्ट्रपति वेंस से हुई, तो मुझे यह आभास हुआ कि वह और राष्ट्रपति दोनों ही युद्ध की उलझनों से बचना चाहते थे। इसलिए मैं आग्रह करता हूं कि युद्धविराम को बढ़ाया जाए और बातचीत जारी रखी जाए। सफलता के लिए शायद सभी को कुछ कठिन समझौते करने पड़ें, लेकिन ये विफलता और युद्ध के दर्द के मुकाबले कुछ भी नहीं हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत बेनतीजा रहने पर अमेरिका के सामरिक मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप घरेलू व राजनीतिक कारणों से ऐसा डील चाहते हैं कि वह किसी तरह इस युद्ध से बाहर निकले। इतने सीनियर लेवन का बातचीत के लिए पाकिस्तान आना यह बताता है कि अमेरिका युद्ध खत्म करने को लेकर सीरियस है। वेंस के कमेंट्स के बावजूद, शायद यह अभी खत्म नहीं हुआ है। बातचीत हो सकती है - लेकिन यह साफ नहीं है कि वे पाकिस्तान में होंगी या कहीं और।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम रीसेट कर रहे हैं। हम मिडिल ईस्ट में तैनात अपने युद्धपोतों, मिसाइल बेसों और फाइटर जेट्स में सबसे बेहतरीन गोला-बारूद भर रहे हैं। ये पहले इस्तेमाल किए गए गोला बारूद से बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो हम इन हथियारों का इस्तेमाल करेंगे, और बहुत असरदार तरीके से करेंगे। उन्होंने नेवल ब्लॉकेड की धमकी भी दी है।
ईरान के संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि पिछले दो युद्धों के अनुभव के आधार पर हमें अमेरिकी बातों पर भरोसा नहीं है। गालिबाफ ने कहा कि हमने कई रचनात्मक प्रस्ताव दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमारे तर्कों व सिद्धांतों को समझ चुका है। अब उसे फैसला करना है कि वह हमारा विश्वास जीत सकता है या नहीं।
Published on:
12 Apr 2026 08:00 pm
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