
काबुल में पानी की समस्या (फोटो - वॉशिंगटन पोस्ट)
दुनियाभर में ऐसे कई देश हैं जहाँ पानी की कमी देखने को मिल रही है। उन्हीं में से एक अफगानिस्तान भी है। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पिछले कुछ समय में पानी की कमी बढ़ती जा रही है। कम बारिश और बर्फ पिघलने की वजह से काबुल सूखता जा रहा है। जल भंडार जितनी तेज़ी से भर रहे हैं, उससे लगभग दोगुनी तेज़ी से खाली हो रहे हैं। नकदी की कमी के कारण तालिबान प्रशासन अब तक आस-पास के बांधों और नदियों से घुटन भरे शहर में पानी नहीं ला पाया है।
हाल ही में एक गैर-लाभकारी संस्था मर्सी कॉर्प्स ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार काबुल में आने वाले सालों में पानी का संकट और बढ़ सकता है। इससे 2030 तक 60 लाख लोगों को पानी से वंचित होना पड़ सकता है।
मर्सी कॉर्प्स की रिपोर्ट के अनुसार काबुल पर भूमिगत जल आपूर्ति से खाली होने वाली पहली राजधानी (अफगानिस्तान की राजधानी) बनने का खतरा मंडरा रहा है। बर्फीले पहाड़ों से घिरा और तीन नदियों से घिरा काबुल कभी भी सूखे शहर के रूप में नहीं जाना जाता था। लेकिन पिछले 25 सालों में इसकी आबादी लगभग दोगुनी हो गई है, फिर भी अन्य स्रोतों से पानी लाने या भूमिगत जल निकासी को नियंत्रित करने के लिए कोई अच्छी जल प्रबंधन प्रणाली नहीं बनाई गई है।
अफगानिस्तान में जल आपूर्ति एक गंभीर मुद्दा है। जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल कम से कम 7,00,000 अफ़ग़ान विस्थापित होते हैं। पानी की समस्या को देखते हुए काबुल के निवासी अब ज़्यादा से ज़्यादा बोरहोल खोद रहे हैं, जिससे अनियमित जल निकासी से शहर में पानी भर रहा है।
जानकारी के अनुसार अफग़ानिस्तान के 4.2 करोड़ लोगों में से एक-तिहाई लोगों के पास साफ पानी तक पहुंच नहीं है। काबुल समेत देश के कई हिस्सों में कुएं में पानी सूख रहा है। बांधों में भी पानी का लेवल कम हो रहा है। ऐसे में आने वाले साल, काबुल के लिए काफी चिंतनीय हो सकते हैं।
Published on:
14 Aug 2025 01:57 pm
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