
इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) ने कश्मीर के लोगों के प्रति संवेदना ज़ाहिर करते हुए ट्वीट किया है। ओआईसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जैसा कि 27 अक्टूबर 2022 को, जम्मू और कश्मीर को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से अधिकृत करने के 75 साल पूरे हो रहे हैं, ओआईसी जम्मू और कश्मीर के लोगों के प्रति अपनी पूरी संवेदना ज़ाहिर करता है।
भारत कर रहा जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफिक स्थिति में परिवर्तन का प्रयास
ओआईसी ने कहा कि भारत ने 5 अगस्त 2019 को अवैध और एकतरफा कार्रवाई करते हुए गैर कानूनी तरीके से जम्मू-कश्मीर की विधिक स्थिति में परिवर्तन किया था। ओआईसी ने इन कदमों को रोकने और इस फैसले को पलटने का अनुरोध किया है। ओआईसी ने जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताते हुए आरोप लगाया कि भारत जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफिक स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है।
ओआईसी में पाकिस्तान के इशारे पर जारी किया गया बयान
बता दें, ओआईसी की बैठकों में भारत पर इस तरह के आरोप पहली बार नहीं लगाए गए हैं। पाकिस्तान की पहल पर ओआईसी की बैठकों में पहले भी हो चुकी है भारत की कश्मीर को लेकर आलोचना।
क्या है ओआईसी?
ओआईसी के दुनिया भर के 57 मुसलमान बहुल देश सदस्य हैं। ओआईसी पर सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का दबदबा है। ओआईसी का उद्देश्य दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बनाए रखते हुए मुसलमानों के हितों की सुरक्षा करना है। इस समूह के सदस्य केवल मुस्लिम देश ही हो सकते हैं। सदस्य देशों के अलावा रूस, थाईलैंड और कुछ दूसरे छोटे देशों को आब्ज़र्वर का स्टेट्स मिला हुआ है।
भारत की ऑब्जर्वर स्टेटस पर पाकिस्तान ने लगाया था अड़ंगा
2018 में बांग्लादेश ने सुझाव रखा था कि दुनिया भर के मुसलमानों की कुल आबादी के 10 प्रतिशत से ज़्यादा लोग भारत में रहते हैं, लिहाज़ा भारत को आब्ज़र्वर का स्टे्टस दिया जाए, हालांकि पाकिस्तान के विरोध के चलते यह यह संभव नहीं हो सका। हालांकि 2019 में ओआईसी के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पहली बार गेस्ट ऑफ़ ऑनर के तौर पर शामिल हुई थीं।
वैसे ओआईसी के क़रीब हर सदस्य देश के साथ भारत के रिश्ते मधुर हैं। हाल के सालों में संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ भारत के रिश्ते बेहतर हुए हैं।
Published on:
27 Oct 2022 04:15 pm
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