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बम ही नहीं परमाणु परीक्षण भी है खतरनाक: शोध में कहा, ‘गर्भ में पल रहे बच्चे और महिलाएं…’

Effects of Nuclear Weapons: 1945 से 2017 के बीच हुए परमाणु परीक्षणों ने पूरी दुनिया को दूषित किया है। एक नई शोध रिपोर्ट के मुताबिक, इन विस्फोटों से लाखों लोगों की असमय मौत हुई और असर आज भी जारी है।

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भारत

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Kuldeep Sharma

Jan 23, 2026

Hinamoeura Morgant Cross

परमाणु रेडिएशन से सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं और बच्चे। (Photo-X)

NPA Report on Nuclear Test: परमाणु हथियारों के परीक्षण पर एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। ये परीक्षण केवल परमाणु परीक्षण ही नहीं थे। इनका मानव जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।

नार्वेजियन पीपुल्स एड (NPA) संस्था ने परमाणु परीक्षण पर एक विस्तृत शोध रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1945 से 2017 के बीच दुनिया भर में हुए 2,400 से ज्यादा परमाणु विस्फोट सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं थे, बल्कि ऐसे बम थे जिनका असर हर इंसान के शरीर तक पहुंचा है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि आज धरती पर जिंदा हर व्यक्ति की हड्डियों में उन वायुमंडलीय परीक्षणों से निकले रेडियोधर्मी तत्व मौजूद हैं।

आज कोई भी इंसान अछूता नहीं

NPA की 304 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, परमाणु परीक्षणों ने सीमाएं नहीं मानीं। हवा के जरिए फैला रेडिएशन महाद्वीपों को पार करता रहा और धीरे-धीरे पूरी मानव आबादी को प्रभावित करता गया।

रिपोर्ट की सह-लेखिका प्रोफेसर मैग्डालेना स्टॉकोव्स्की के अनुसार, इन परीक्षणों का असर इतना गहरा है कि आज कोई भी इंसान इससे अछूता नहीं है। अनुमान है कि अब तक कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों से कम से कम 40 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो चुकी है।

अकेले 1980 तक हुए वायुमंडलीय परीक्षणों से 20 लाख अतिरिक्त कैंसर मौतों और उतनी ही दिल के दौरे व स्ट्रोक से मौतों की आशंका जताई गई है।

जब परमाणु परीक्षण हुआ था घर के पास

फ्रेंच पोलिनेशिया की सांसद हिनामोएुरा मॉर्गेंट-क्रॉस की कहानी रिपोर्ट में किए दावों को उदाहरण के साथ पेश करती है। साल 1996 में फ्रांस ने ताहिती स्थित हिनामोएुरा के घर के पास अपना आखिरी परमाणु परीक्षण किया। उस वक्त हिनामोएुरा सिर्फ 7 साल की थीं। 24 की उम्र में उन्हें ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) हो गया।

उनकी दादी और चाची पहले से ही थायराइड कैंसर से जूझ रही थीं। हिनामोएुरा कहती हैं, “वे सिर्फ टेस्ट नहीं थे, असली बम थे।” आज वे परमाणु परीक्षणों से लंबे समय तक पड़ने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक असर के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रही हैं।

सबसे ज्यादा खतरे में महिलाएं और बच्चे

वैज्ञानिकों का कहना है कि रेडिएशन का कोई भी स्तर पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। खासकर गर्भ में पल रहे भ्रूण और छोटे बच्चे इसके प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लड़कों और पुरुषों की तुलना में लड़कियां और महिलाएं रेडिएशन से होने वाले नुकसान के प्रति करीब 52 फीसदी ज्यादा संवेदनशील होती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ परमाणु हथियारों पर पूरी तरह रोक की मांग कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, हिनामोएुरा मॉर्गेंट-क्रॉस ने परमाणु हथियारों के विरोध में फ्रेंच पोलिनेशिया की विधानसभा में परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि का समर्थन किया और इस लड़ाई को राजनीतिक मंच तक पहुंचाया है।