
बचपन में हुआ था यौन शोषण। (फोटो: AI)
Childhood Trauma: अक्सर कहा जाता है कि पुराने जख्म समय के साथ भर जाते हैं, लेकिन बचपन में मिले यौन शोषण (Sexual Abuse)के घाव ताउम्र रिसते रहते हैं। एक व्यक्ति, जिसे हम 'रॉबर्ट' (बदला हुआ नाम) कहेंगे, उसने 40 साल की उम्र तक इस दर्द को अपने सीने में दबाए रखा। लेकिन जब लंदन में उन्होंने पुलिस के सामने अपनी चुप्पी तोड़ी, तो उन्हें एक नई जिंदगी मिल गई। रॉबर्ट (Sexual Abuse Survivor) की कहानी हमें सिखाती है कि न्याय मांगने की कोई समय सीमा नहीं होती। रॉबर्ट महज सात साल के थे जब उनके भरोसे का कत्ल हुआ। अपराधी कोई और नहीं, बल्कि उनके दोस्त का बड़ा भाई था, जिसकी उम्र उस समय 20 साल थी। एक बच्चे के तौर पर रॉबर्ट समझ ही नहीं पाए कि उनके साथ क्या हुआ (Child Abuse Report), और डर के मारे यह बात किसी से कह नहीं सके। यह डर उनके साथ बड़ा होता गया और वे 40 साल के हो गए।
दशकों बाद हिम्मत जुटा कर रॉबर्ट पुलिस के पास गए। उनकी शिकायत पर कार्रवाई हुई, आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया और उस पर आरोप तय हुए। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था,मुकदमा पूरा होने से पहले ही आरोपी की मौत हो गई। हालांकि रॉबर्ट को अदालत में अपनी गवाही देने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं है।
रॉबर्ट कहते हैं, "मैंने बरसों तक यह बोझ अकेले ढोया। मुझे लगता था कि अब बहुत देर हो चुकी है, कोई मेरी नहीं सुनेगा। लेकिन जब मैंने पुलिस को बताया, तो उन्होंने मुझ पर 'विश्वास' किया। मेरे लिए यही सबसे बड़ी जीत थी।"
रॉबर्ट LGBTQ+ समुदाय से आते हैं। वह बताते हैं कि एक तो शोषण का डर और ऊपर से समाज द्वारा गलत समझे जाने का भय-इन दोनों ने उन्हें लंबे समय तक चुप रखा। उनका कहना है, "आपकी पहचान चाहे जो भी हो, वह आपके साथ हुए अपराध को कम नहीं करती। सच बोलना मेरे जीवन का सबसे कठिन काम था, लेकिन आज मैं खुद को पहले से कहीं ज्यादा साहसी और मजबूत महसूस कर रहा हूं।"
रॉबर्ट की कहानी भारत के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है। भारत में भी बाल यौन शोषण (Child Sexual Abuse) के मामले चिंताजनक हैं।
चुप्पी की संस्कृति: भारत में अक्सर 'लोकलाज' के डर से परिवार मामले को दबा देते हैं। लड़कों के साथ होने वाले यौन शोषण पर तो समाज और भी कम बात करता है।
कानून क्या कहता है: भारत में POCSO (पॉक्सो) एक्ट, 2012 एक सशक्त कानून है जो बच्चों (लड़के और लड़कियों दोनों) को यौन अपराधों से बचाता है।
देर से रिपोर्टिंग: कई बार पीड़ित बालिग होने के बाद शिकायत करना चाहते हैं। भारतीय कानून में देरी के कारण को अगर तार्किक रूप से समझाया जाए, तो अदालतें मामलों को स्वीकार करती हैं। 'मी टू' (#MeToo) अभियान के दौरान कई पुराने मामले सामने आए थे।
पुलिस का रवैया: रॉबर्ट के मामले में पुलिस के 'विश्वास' ने उन्हें ताकत दी। भारतीय पुलिस को भी पीड़ितों के प्रति संवेदनशील होने के लिए लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि पीड़ित थाने आने से डरें नहीं।
उत्तरी आयरलैंड पुलिस (PSNI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 4,360 यौन अपराध दर्ज किए गए। इनमें 326 शिकायतें पुरुषों द्वारा दर्ज कराई गईं। यह दर्शाता है कि अब पुरुष भी अपनी चुप्पी तोड़ रहे हैं। पुलिस का स्पष्ट संदेश है-"यौन अपराध कभी भी पीड़ित की गलती नहीं होती।"
मनोवैज्ञानिकों का कहना है: "जब कोई पीड़ित अपनी कहानी सुनाता है और उस पर विश्वास किया जाता है, तो यह 'हीलिंग' (घाव भरने) की प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा होता है। रॉबर्ट का मजबूत महसूस करना इसी स्वीकार्यता का परिणाम है।"
कानूनी जानकारों की राय: "आरोपी की मौत से केस भले ही बंद हो जाए, लेकिन पीड़ित के लिए यह मानसिक शांति लाता है कि उसने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। यह कदम दूसरों को प्रेरित करेगा।"
जागरूकता अभियान: पुलिस और संस्थाओं को यह प्रचारित करना होगा कि शोषण की रिपोर्ट करने की कोई 'एक्सपायरी डेट' नहीं होती।
काउंसलिंग: रॉबर्ट जैसे पीड़ितों के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट ग्रुप्स की जरूरत है, ताकि वे अपने ट्रॉमा से पूरी तरह बाहर आ सकें।
समाज की भूमिका: हमें अपने बच्चों को 'गुड टच-बैड टच' सिखाने के साथ-साथ यह भी सिखाना होगा कि अगर कोई अपना भी गलत करे, तो आवाज उठाना सही है।
एक महत्वपूर्ण पहलू 'पुरुषों का यौन शोषण' है। अक्सर समाज मानता है कि पुरुष या लड़के अपना बचाव करने में सक्षम होते हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा नहीं हो सकता। रॉबर्ट का सामने आना उस मिथक को तोड़ता है। यह बताता है कि दर्द का कोई जेंडर नहीं होता। एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लिए यह और भी मुश्किल होता है क्योंकि उन्हें डर होता है कि पुलिस या समाज उनके चरित्र पर ही सवाल उठा देगा। रॉबर्ट की हिम्मत उन हजारों लोगों के लिए एक मिसाल है जो आज भी अपने अतीत के अंधेरे कमरों में घुट रहे हैं।
Updated on:
05 Feb 2026 04:50 pm
Published on:
05 Feb 2026 04:49 pm
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
