
Russian President Vladimir Putin
Nuclear Weapons: इन दिनों पूरी दुनिया की राजनीति एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन (Russia-Ukraine War) और इजरायल हमास के युद्धों समेत मिडिल ईस्ट में फैले तनाव ने पूरे विश्व की सिय़ासत में गहमागहमी मचा दी है। इधर पश्चिमी देश यूक्रेन के समर्थन में आकर रूस (Russia) से दुश्मनी मोल रहे हैं तो वहीं रूस भी इन देशों को बार-बार परमाणु हमले (Nuclear Attack) की धमकी देता रहता है। ऐसे में SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक रिपोर्ट निकाली है कि एक-दूसरे को परमाणु हमले की धमकी देने वाले इन देशों के पास आखिर कितने परमाणु हथियार हैं जो आए दिन ये इनके बल पर एक-दूसरे को धमकाते रहते है, तो नतीजे चौंकाने वाले निकले।
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के पास अमेरिका (USA) से भी ज्यादा परमाणु हथियार हैं। रूस के पास 5580 न्यूक्लियर वेपन हैं तो अमेरिका के पास 5044 परमाणु हथियार हैं। वहीं भारत (India) के लिए एक बड़ी उपलब्धि इस लिस्ट में दिखाई दी है, वो ये कि भारत के पास दुश्मन देश पाकिस्तान (Pakistan) से भी ज्यादा परमाणु हथियार हो गए हैं। जो कि एक एतिहासिक उपलब्धि है। भारत के पास 172 परमाणु हथियार हो गए हैं तो वहीं पाकिस्तान के पास सिर्फ 170 परमाणु हथियार ही हैं।
वहीं पूरी दुनिया में विस्तारवादी नीति को बढ़ावा देने वाला चीन (China) इस मामले में अमेरिका और रूस के कोसों दूर है। चीन के पास सिर्फ 500 परमाणु हथियार हैं। इस लिस्ट में सबसे अहम रहा नॉर्थ कोरिया, दरअसल जिस नॉर्थ कोरिया (North Korea) के तानाशाह किम जोंग आए दिन हथियारों और मिसाइलों का टेस्ट कराते फिरते हैं उस उत्तर कोरिया के पास सिर्फ 50 परमाणु हथियार हैं। कोरिया से ज्यादा न्यूक्लियर वेपन तो इजरायल (Israel) के पास हैं। इजरायल के पास 90 परमाणु हथियार हैं।
SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक हथिय़ारों का ये जखीरा (Nuclear Weapons) दिखाता है कि साल 2023 के मुकाबले 2024 में इनमें बढ़ोतरी हुई है। य़ही नहीं इनमें से जिन हथियारो को तैनाती मिली है उनकी संख्या 2023 के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। यानी बीते 2 साल में रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास और मिडिल ईस्ट तनाव ने इन देशों को त्वरित कार्रवाई वाले मोड पर लाकर खड़ा कर दिया है, जो इन देशों के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक भयानक खतरे का निशान है।
ये दिखाता है कि परमाणु हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण कूटनीति को 2023 में और अधिक बड़े झटके लगे हैं। फरवरी 2023 में रूस ने घोषणा की थी कि वो सामरिक आक्रामक हथियारों (न्यू स्टार्ट) की और कमी और सीमा के लिए उपायों पर 2010 की संधि में अपनी भागीदारी को निलंबित कर रहा है। जो कि आखिरी बचे शेष परमाणु हथियार नियंत्रण रूसी और अमेरिकी सामरिक परमाणु बलों को सीमित करने वाली संधि थी। इस जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमेरिका ने भी इस संधि को तोड़ दिया था।
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Updated on:
24 Jun 2024 05:14 pm
Published on:
24 Jun 2024 05:11 pm
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