
WHO-UNICEF ने जारी किए नए आंकड़े, भारत में 6.79 लाख बच्चे रहे ‘जीरो डोज’ | फोटो-patrika
Child Vaccination Data: बच्चों की सेहत और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। साल 2025 में भारत के करीब 6.79 लाख बच्चों को उनके जन्म के पहले साल में वैक्सीन की एक भी खुराक (Zero-Dose) नहीं मिली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) की संयुक्त वार्षिक रिपोर्ट 'WUENIC' में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। ग्लोबल लेवल पर तो स्थिति और भी ज्यादा खराब है, जहां 1.35 करोड़ से ज्यादा बच्चे 'जीरो-डोज' की कैटेगरी में रह गए हैं। इस लिस्ट में नाइजीरिया सबसे आगे है, जहां 22 लाख बच्चों का टीकाकरण नहीं हो सका।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 90% बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (DTP) का पहला टीका तो मिल गया, लेकिन सभी बच्चे कोर्स पूरा नहीं कर पाए। सिर्फ 85% बच्चों को ही टीके की तीनों खुराकें मिल सकी। कोरोना महामारी के बाद से टीकाकरण के मामले में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है, लेकिन हम अभी भी 2019 के आंकड़ों से पीछे चल रहे हैं।
अगर पूरी दुनिया की बात करें तो करीब 1.35 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें उनके जीवन के पहले साल में एक भी टीका नहीं मिल पाया। वैश्विक स्तर पर इन आंकड़ों को देखें तो सबसे खराब हालत नाइजीरिया की है, जहां 22 लाख बच्चों को एक भी टीका नहीं मिल सका।
चिंता की बात सिर्फ यह नहीं है कि बच्चों को टीका नहीं मिला, बल्कि एक बड़ी समस्या 'ड्रॉपआउट रेट' (टीकाकरण बीच में छोड़ना) की भी है। वैश्विक स्तर पर करीब 73 लाख बच्चों ने DTP का पहला टीका तो लगवाया, लेकिन वे खसरे (Measles) का पहला टीका लगने से पहले ही इस लिस्ट बाहर हो गए।
यही वजह है कि दुनिया के 84% बच्चों को खसरे की पहली और सिर्फ 77% बच्चों को दूसरी खुराक मिल सकी। यही वजह रही कि साल 2025 में दुनिया के 57 देशों में खसरे की बीमारी का बड़ा संकट देखने को मिला।
इस रिपोर्ट में एक और हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। सिर्फ गरीब देशों में ही नहीं, बल्कि अमीर देशों में भी टीकाकरण का ग्राफ गिरा है। इसके पीछे की वजह है- लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर बढ़ता डर या हिचकिचाहट।
WHO के चीफ टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि चाहे बच्चा अमीर घर में पैदा हुआ हो या गरीब, शांत माहौल में हो या युद्ध के बीच, उसे टीका मिलना ही चाहिए। यह बच्चों की सुरक्षा का सबसे सस्ता और सुरक्षित तरीका है।
यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल के अनुसार, सरकारों और हेल्थ वर्कर्स ने कोविड-19 के दौरान गिरे टीकाकरण स्तर को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की है। लेकिन युद्ध, गरीबी और मजबूरी में घर छोड़ने के कारण आज भी लाखों बच्चे वैक्सीन से दूर रह जाते हैं। अब WHO और UNICEF जैसी संस्थाएं मिलकर 'इम्यूनाइजेशन एजेंडा 2030' पर काम कर रही हैं, ताकि दुनिया के हर कोने में हर बच्चे तक सही समय पर वैक्सीन पहुंचाई जा सके और उनकी जान बचाई जा सके।
Updated on:
16 Jul 2026 10:35 am
Published on:
16 Jul 2026 09:54 am
