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Periods Problem: माहवारी यानी पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान वे सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर भी काफी परेशान रहती हैं। अब मेडिकल जर्नल लैंसेट (Lancet) ने पीरियड्स के दौरान आने वाली मुश्किलों पर एक रिसर्च की है, जिसमें ये कहा गया है कि इस दौरान जो महिलाओं के सामने जो सबसे बड़ी समस्या (Women Problems During Periods) होती है वो है बाहर जाकर काम करने की, चाहे वो ऑफिस हो, कॉलेज-स्कूल जाना हो, या फिर बाहर का अपना कोई काम निपटाना हो।
लैंसेट की इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में दक्षिण एशियाई देशों की सबसे ज्यादा 20 फीसदी महिलाएं काम से दूर रहती हैं। इनमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल और भूटान शामिल हैं। लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में छपी रिसर्च के मुताबिक इन देशों की कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान दफ्तर जाने से परहेज के अलावा बाहर के रोजमर्रा के कामकाज से भी बचती हैं।
ऑस्ट्रेलिया की मेलबॉर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने शोध के दौरान 2017-2023 में 44 देशों का सर्वे किया। सर्वे में 15-49 साल की 6.73 लाख से ज्यादा महिलाओं से बातचीत की गई। रिपोर्ट के मुताबिक कम आय वाले देशों में 15 फीसदी महिलाएं पीरियड्स के दौरान काम से बचना चाहती हैं। पश्चिम और मध्य अफ्रीका में यह प्रतिशत 18.5 है। शोध में बताया गया कि पीरियड्स के दौरान 15 से 19 साल की 17 फीसदी लड़कियां रोजमर्रा के कामों में शामिल नहीं होतीं।
शोध रिपोर्ट के मुताबिक पीरियड्स के दौरान महिलाएं रोजाना के कामों से इसीलिए नहीं बचतीं कि उनके पास सैनिटरी पैड (Sanitary Pads) या टैम्पोन नहीं है या तनाव में रहती हैं या आराम करना चाहती हैं। वे काम के लिए बाहर इसलिए नहीं जाना चाहतीं, क्योंकि घर में साफ-सुथरा वॉशरूम है। प्राइवेट स्पेस है, जहां वे स्वास्थ्य जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकती हैं।
कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान घूमने नहीं जाना चाहतीं। वे घर में रहना पसंद करती हैं। पीरियड्स में होने वाला दर्द भी रोजाना के कामों को छोडक़र घर पर रहने की एक वजह है। रिपोर्ट में कहा गया पीरियड्स के दौरान महिलाओं की क्वालिटी ऑफ लाइफ पर असर पड़ता है और लैंगिक गैर-बराबरी पैदा होती है।
Updated on:
31 Jan 2025 09:27 am
Published on:
31 Jan 2025 08:59 am
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