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विश्व पर्यावरण दिवस: लोगों की ज़रूरत बन चुका स्मार्टफोन है पर्यावरण प्रदूषण का बड़ा कारण, जानिए कैसे

World Environment Day: आज विश्व पर्यावरण दिवस है। आज के दिन लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई काम किए जाते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण का एक बड़ा कारण जो आज सभी की ज़रूरत बन चुका है? उसके बारे में जानकार आप हैरान हो सकते हैं। आइए जानते हैं।

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जयपुर

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Tanay Mishra

Jun 05, 2023

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Environment Pollution caused by Data

आज, 5 जून का दिन दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के रूप में मनाया जाता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए आज के दिन कई जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं और लोगों को पर्यावरण के प्रति सजग किया जाता है। पर पर्यावरण संरक्षण के लिए हर दिन प्रयास ज़रूरी है। पर्यावरण को कई चीज़ों से नुकसान पहुंचता है। इनमें से एक ऐसी चीज़ भी है जो लोगों की ज़रूरत बन चुका है। इस चीज़ की इंसानों की ज़िंदगी में अहम जगह है और इसके बिना एक दिन निकालना भी मुश्किल होता है। क्या आप जानते हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं? हम बात कर रहे हैं स्मार्टफोन की।


स्मार्टफोन है पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा

स्मार्टफोन आज के इस समय में पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। इससे आपकी न सिर्फ आपकी आँखों, समय, नींद पर असर पड़ता है, रुपये की भी बर्बादी होती है। पर इतना ही नहीं, स्मार्टफोन से पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह है इसका डाटा। सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, लैपटॉप, टैबलेट से जनरेट होने वाले डाटा के साथ सेंटर्स में संग्रहित डाटा भी पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है।


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भारत में हो रहा है बड़े लेवल पर डाटा जनरेट


कुछ समय पहले आई इंटरनेशनल डाटा कॉर्पोरेशन (आइडीसी) और स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर घंटे 504 करोड़ जीबी डाटा जनरेट हो रहा है। दुनिया में 94 लाख करोड़ जीबी से ज्यादा डाटा स्टोर किया हुआ है। इस डाटा से पर्यावरण पर काफी बुरा असर पड़ता है।

कैसे होता है स्मार्टफोन और दूसरे गैजेट्स से पर्यावरण प्रदूषित?

क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन और दूसरे गैजेट्स से पर्यावरण कैसे प्रदूषित होता है? आइए जानते हैं इसके कुछ कारण।

24 घंटे सिस्टम चालू रहने से 18 करोड़ टन कोयले की खपत होती है जिसका बुरा असर पर्यावरण पर पड़ता है।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ को ठंडा रखने के लिए दिन-रात एसी चलने से क्लोरो- फ्लोरो गैस निकलती है। इससे ओजोन परत कमजोर होती है और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है।
डीज़ल का भारी मात्रा में उपयोग ट्रांसफॉर्मर को रिलीफ देने के किया जाता है, जिसका पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है।
कम्प्यूटिंग उपकरणों को हर 4 साल में बदलने से ई-वेस्ट जनरेट होता है जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।

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