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Laziest Country: ये है एक नंबर का आलसी देश, कहां है भारत की रैंक 

Laziest Country: हैरानी की बात ये है कि इन आलसी देशों में दुनिया की सबसे मजबूत शक्ति और खुद को सुपर पॉवर कहता संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है।

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Laziest Country

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Laziest Country: आपने अपनी मम्मी या पापा से एक बात खुद के लिए कहते सुना होगा कि आप एक नंबर के आलसी हो। सिर्फ आपके घर का नहीं बल्कि हर तीसरे घर में आपको आलसी लोग मिल जाएंगे। कहा तो ये भी जाता है भारत में बहुत आलसी लोग (Lazy) है, लेकिन ये तथ्य गलत है, हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दुनिया के सबसे आलसी देशों की लिस्ट जारी की गई है। इस लिस्ट में सबसे पहले नंबर जिस देश ने जगह बनाई है वो भारत का ही मित्र देश है।

कौन सा देश सबसे आलसी?

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इसकी रिसर्च के लिए 46 देशों से करीब 7 लाख से ज्यादा लोगों का डेटा एनालिसिस किया गया। उनके रोज चलने से लेकर स्मार्टफोन डेटा का इस्तेमाल किया गया। जिसके बाद ये रैंकिंग निकाली गई। इस रैंकिंग के मुताबिक पूरी दुनिया में इंडोनेशिया के लोग सबसे आलसी बताए गए। इंडोनेशिया में लोग सबसे ज्यादा आलसी हैं। वहां पर लोग रोजाना सिर्फ 3513 कदम चलते हैं। साथ ही वहां पर लोग दैनिक व्यायाम या रोजमर्रा के काम भी करने में आलस करते हैं। 

दूसरे नंबर पर कौन?

इंडोनेशिया के बाद दूसरे नंबर पर आलसी देशों में नाम आता है सऊदी अरब का। सऊदी में लोग हर दिन औसतन सिर्फ 3,807 कदम चलते हैं। देश की गर्म जलवायु और कल्चर सऊदी की कम शारीरिक गतिविधिय़ों में अहम भूमिका निभाते हैं। गर्मी के चलते सऊदी में लोग घरों में रहना पसंद करते हैं। 

कहां है भारत?

इस लिस्ट में भारत भी टॉप 10 में शामिल हैं। भारत को इस लिस्ट में 10वीं रैंकिंग मिली है। भारत के लोग औसतन दिन में 4,297 कदम ही चलते हैं। भारत के तेजी से होते शहरीकरण और बदलती लाइफस्टाइल इस आलसपन का सबसे कारण हैँ। रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में फिजिकल एक्टिवटी में काफी गिरावट देखी गई है। यहां के रहने वाले लोग जरा सी दूरी की लिए भी अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं या फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेते हैं। 

क्यों बढ़ रहा लोगों में इतना आलस 

रिपोर्ट के मुताबिक आधुनिक तकनीक और सुविधाओं ने फिजिकल एक्टिविटी को काफी कम कर दिया है, जिससे गतिहीन जीवनशैली अपनाई जा रही है। इसके अलावा डिजिटल एंटरटेनमेंट और सोशल मीडिया की 24 घंटे उपलब्धता ने एक्टिविटी को और भी कम कर लिया है। 

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