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इस्लामिक रीजिम के खिलाफ खड़े हुए युवा, क्या ट्रंप के कारण खुमैनी शासन को मिल रही चुनौती ?

ईरान में इस्लामिक रीजिम के खिलाफ युवाओं ने मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। वहां महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर है।

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ईरान में सड़कों पर उतरे लोग (Photo-X)

ईरानी मुद्रा रिकॉर्ड स्तर पर गिर चुकी है। 1 डॉलर 14 लाख रियाल पर जा पहुंचा है। महंगाई भी 40 फीसदी को पार कर गई है। इरान के प्रमुख शहरों में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शन सीधे तौर पर ईरान की इस्लामिक रीजिम और अयातुल्लाह अल खुमैनी की सरकार को सीधी चुनौती दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी 'मुल्लाओं को जाना होगा', 'तानाशाही मुर्दाबाद' और 'मौत तानाशाह को' जैसे नारे लगा रहे हैं। यह 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए बड़े प्रदर्शनों के बाद ईरान में सबसे बड़ा जनआंदोलन है।

प्रदर्शन पर ट्रंप का आया बयान

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA पर दुनिया भर में सरकार गिराने के दवाब के आरोप लगते रहे हैं। अमेरिका लगातार ईरान में इस्लामिक रीजिम को खत्म करने की बात करता आया है। अब वहां हो रहे प्रदर्शन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान से हवा दे दी है।

ट्रंप ने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था 'खराब' हो चुकी है। वहां के लोग खुश नहीं हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की निंदा की, लेकिन शासन परिवर्तन की बात से इनकार किया। अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और कहा कि ईरान के युवा बेहतर भविष्य चाहते हैं। पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि ईरान की जनता मुल्लाओं के भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी है।

ईरानी-अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने कहा कि यह उन लोगों की आवाज है, जो ईरान में इस्लामिक रीजिम नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पूर्व शाह रेजा पहलवी के समर्थन में 'जावीद शाह' के नारे भी लगाए।

अमेरिका ने ईरान की आंतरिक कमजोरियों को उजागर किया

ईरान में हो रहे प्रदर्शन पर सामारिक मामलों के विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रंप की नीति ने ईरान के शासन की आंतरिक कमजोरियों को उजागर किया है। अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरानी अर्थव्यवस्था को बुरी तरीके से प्रभावित किया है। तेल से आने वाली आमदनी घट गई है। वैश्विक प्रतिबंध की वजह से इकॉनोमी चरमरा गई है और इंफ्लेशन बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका भले ही यह कह रहा हो कि उसके द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का उद्देश्य शासन परिवर्तन नहीं, बल्कि परमाणु कार्यक्रम रोकना है। फिर भी, ये प्रदर्शन शासन के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर सकते हैं, क्योंकि 92 मिलियन की आबादी में आर्थिक असंतोष राजनीतिक विद्रोह में बदल रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए यह बड़ा चुनौती है।