
Chaitra Month 2025 Start Date: चैत्र महीने में क्या करें और क्या न करें
Chaitra Month 2025 Start Date : हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीना 15 मार्च से शुरू होकर 12 अप्रैल तक रहेगा। इस महीने के तीज-त्योहार बेहद खास होते हैं, क्योंकि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष से ही हिंदू नववर्ष शुरू हो जाता है। इस महीने ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि रची थी और भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था।
चैत्र महीने में सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है और इसी महीने में पहली ऋतु होती है यानी वसंत का मौसम होता है।ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार हिंदू कैलेंडर का पहला महीना चैत्र 15 मार्च से शुरू शुरू होगा और 15 दिनों बाद यानी 30 मार्च को हिंदू नववर्ष शुरू होगा। इन 15 दिनों की गिनती नए साल में नहीं होती, क्योंकि इन दिनों चंद्रमा अंधेरे की ओर यानी अमावस्या की तरफ बढ़ता है।
इन 15 दिनों में चंद्रमा लगातार घटता है और अंधेरा बढ़ता है, लेकिन सनातन धर्म तमसो मां ज्योतिर्गमय यानी अंधेरे से उजाले की तरफ जाने की बात करता है, इसलिए चैत्र महीने की अमावस्या के अगले दिन पहली तिथि को जब चंद्रमा बढ़ने लगता है तभी नववर्ष मनाते हैं। आइये जानते हैं चैत्र महीने में क्या करना चाहिए..
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार चैत्र में सूर्य अपनी उच्च राशि, मेष में प्रवेश करता है। इन दिनों वसंत ऋतु रहती है और मौसम भी बदलता है, जिससे सेहत संबंधी बदलाव भी होते हैं। इस महीने को भक्ति और संयम का महीना भी कहा जाता है। क्योंकि इन दिनों में कई व्रत और पर्व आते हैं।
सेहत को ध्यान में रखते हुए इस महीने में आने वाले व्रत-पर्व की परंपराएं बनाई गई हैं। इस महीने में सूर्योदय से पहले उठकर ठंडे पानी से नहाना चाहिए। इसके बाद उगते हुए सूरज को अर्घ्य देकर दिनभर में एक बार ही खाना खाना चाहिए। ऐसा करने से बीमारियों से बचे रहते हैं और उम्र भी बढ़ती है। ये बातें पुराणों के साथ ही आयुर्वेद ग्रंथों में कही गई है।
पौराणिक मान्यता अनुसार ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला मत्स्य अवतार लेकर प्रलयकाल में जल में से मनु की नौका को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया था। प्रलयकाल खत्म होने पर मनु से ही नई सृष्टि की शुरुआत हुई।
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1.कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास के अनुसार महाभारत के मुताबिक इस महीने एक समय खाना-खाना चाहिए। नियमित रुप से भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा करनी चाहिए और व्रत भी करने चाहिए।
2. इस महीने सूर्योदय से पहले उठकर ध्यान और योग का विधान है। ऐसा करने से तनाव मुक्त और स्वस्थ्य रहते हैं।
3. इस महीने में सूर्य और देवी की उपासना करना चाहिए, जिससे पद-प्रतिष्ठा के साथ ही शक्ति और ऊर्जा भी मिलती है।
4. चैत्र महीने के दौरान नियम से पेड़-पौधों में जल डालना चाहिए और लाल फलों का दान करना चाहिए।
5. चैत्र महीने में एक वक्त खाना खाने से बीमारियों से बचे रहते हैं। इस महीने में गुड़ खाने की मनाही है। वहीं, नीम के पत्ते खाने की बात आयुर्वेद कहता है।
6. सोने से पहले हाथ-मुंह धोने चाहिए और पतले, हल्के कपड़े पहनने चाहिए।
7. संतुलित श्रृंगार करना चाहिए और चैत्र में भोजन में अनाज का उपयोग कम से कम और फलों का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए।
8. इस महीने से बासी भोजन, खाना बंद कर देना चाहिए, आयुर्वेद के मुताबिक इस महीने में ठंडे जल से स्नान करना चाहिए, गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए।
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भविष्यवक्ता डॉ. अनीष व्यास के अनुसार चैत्र में पेट का पाचन तंत्र थोड़ा सा कमजोर हो जाता है, इसलिए इस महीने में दूध का सेवन करना बंद कर दें। इस महीने में दूध का सेवन करना नुकसानदेह हो सकता है। दूध की बजाए इस महीने में दही और मिसरी का सेवन करने से लाभ होगा।
कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास के अनुसार चैत्र मास में नमक का सेवन न करें। इस महीने में कम से कम 15 दिन नमक का सेवन न करें। अगर त्याग न कर सकें तो आप सेंधा नमक भी खाकर काम चला सकते हैं। इस महीने में जिन लोगों को हाई बीपी रहता है उनके लिए नमक छोड़ देना सबसे ज्या दा लाभ देने वाला होता है।
भविष्यवक्ता डॉ. अनीष व्यास के अनुसार चैत्र मास में तली भुनी चीजों का प्रयोग कम से कम करें। इस महीने में आपको अपच की समस्या रहती है। इस महीने में आपको अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए। तरल चीजों का प्रयोग करें और पानी वाले फल अधिक खाएं।
Updated on:
11 Mar 2025 10:42 am
Published on:
10 Mar 2025 12:42 pm
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