
नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बात नहीं करने वाले अलगाववादियों के खिलाफ केंद्र सरकार सख्ती की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो सरकार घाटी में हिंसा को बढ़ावा देने वाले इन अलगाववादियों की सुविधाएं अब बंद कर सकती है।
इन्हें मिलने वाले हवाई टिकट, कश्मीर से बाहर जाने पर होटल और गाड़ियों जैसी लग्जरी सुविधाएं वापस लेने पर विचार किया जा रहा है। बार-बार वार्ता की अपील के बाद भी गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंंडल को अलगाववादियों ने खिड़की से ही लौटा दिया था।
मंगलवार को कश्मीर से लौटकर गृह मंत्री राजनाथ ने पीएम मोदी से मुलाकात कर हालात की जानकारी दी। बैठक के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव ने कहा कि अलगाववादियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है।
सर्वदलीय बैठक में बुधवार को चर्चा की जाएगी। सरकार अलग-अलग क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स के साथ जूनियर मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल भी कश्मीर भेज सकती है।
5 साल में सुरक्षा पर खर्च 500 करोड़
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 5 सालों में जम्मू-कश्मीर सरकार ने अलगाववादियों की सुरक्षा पर 506 करोड़ खर्च किए। सरकार ने 5 सालों में इन पर होटलों में ठहराने के लिए लगभग 21 करोड़ खर्च किए हैं।
सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी हटेंगे
अलगाववादियों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को भी वापस लेने की मांग उठी है, लेकिन इस पर फैसला जम्मू-कश्मीर सरकार को लेना है। फिलहाल इनकी सिक्योरिटी में 900 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं।
इन नेताओं पर गिर सकती है गाज
जिन अलगाववादी नेताओं की सुविधाएं छीनी जा सकती हैं, उनमें हुर्रियत के सैयद अली शाह गिलानी समेत कट्टरपंथी नेता मीरवाइज उमर फारूक और जेकेएलएफ नेता यासीन मलिक शामिल हैं।
राजनाथ ने मोदी को दी जानकारी
राजनाथ सिंह ने कश्मीर दौरे के बाद मंगलवार को पीएम मोदी को जानकारी दी। पीएम मोदी कश्मीर से वापस लौटे 20 पार्टियों के 26 सांसदों से बुधवार को मुलाकात करेंगे।
Published on:
7 Sep 2016, 8:06 AM IST
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