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आगर-मालवा.शिव स्तुति के महापर्व महाशिवरात्रि को लेकर शिवालयों में व्यवस्थागत प्रारंभिक तैयारियां जारी है। चमत्कारिक जीवतंतता के चलते पूरे देश में विख्यात नगराधीपति बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर में शिव स्तुति के महापर्व महाशिवरात्रि के पूर्व धार्मिक आयोजनों का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। यहां ९ फरवरी से प्रारंभ होने वाले पंचकुण्डीय महायज्ञ के लिए मंदिर परिसर में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस महायज्ञ में १६ विद्वान पंडितों के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। १४ फरवरी को इस महापर्व पर दूरदराज से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। उधर, स्थानीय प्रशासन ने अभी से व्यवस्थागत तैयारियों का जिम्मा संबंधित लोगों को सौंपा जा रहा है।
शिवपुराण का भी होगा आयोजन
इस वर्ष शिवरात्री महोत्सव के अंतर्गत संगीतमय शिवपुराण का आयोजन भी किया जा रहा है। श्रीमदï्भागवत मूल पाठ के साथ-साथ शिवपुराण का पाठ भी यहां होगा। मुख्य पुरोहित यज्ञाचार्य पं सुरेन्द्र शास्त्री ने बताया कि अखंड रामायण पारायण के निमित्त पंचकुंडीय रामचरित्र मानस यज्ञ ९ से १३ फरवरी तक चलेगा जिसमें प्रतिदिन १५ यजमान परिवार विश्व शांति के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां देंगे। ५ दिनों तक प्रतिदिन महादेव का रूद्राभिषेक, गणपति मंदिर में गणपति अर्थवशीर्ष पाठ, भैरव मंदिर में भैरवाष्टक पाठक, हनुमान मंदिर में सुंदरकांड का आयोजन किया जाएगा।
भक्त के लिए पैरवी करने पहुंचे महादेव
इसके अलावा बाबा बैजनाथ के अनन्य भक्त रहे स्व. जयनारायण बापजी वकील साहब से जुड़ी एक और चमत्कारिक गाथा स्थानीय स्तर पर प्रचलित है। इस गाथा के अनुसार जयनारायण बापजी वकालत करते थे और नियमित रूप से महादेव दर्शन के लिए बैजनाथ जाते थे ऐसे ही एक बार वे महादेव के ध्यान में इतने मग्न हो गए कि अपने पक्षकार की पैरवी के लिए न्यायालय में समय पर नहीं पहुंच पाए पर वे जब न्यायालय पहुंचे तो पता चला कि वे अपने पक्षकार की पैरवी कर चुके है भगवान बैजनाथ के प्रति अगाद आस्था रखने वाले बापजी के साथ हुए इस चमत्कारिक वृतांत की जीवतंतता के चलते संगमरमर से निर्मित बापजी की आदमकद ध्यानमग्न प्रतिमा मौजूदा मंदिर के सभा मंडप में स्थापित की गई। इस आलौकिक वृतांत वाला कक्ष आज भी न्यायालय में इस गाथा को संजोए हुए है।
अनवरत रामायण का पाठ जारी
लगभग ८.७८ हेक्टेयर भूमि में फैले बैजनाथ धाम में सैकड़ो वर्ष पुराने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अन्य छोटे-बड़े मंदिर भी हैं जिनमें कलापूर्ण प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां वर्ष में दो बार कार्तिक और चैत्र माह में मेले का आयोजन होता है। मंदिर में सन् १९७९ से अखण्ड ज्योति प्रज्ज्वलित है । १९७९ से ही नगर में बाबा बैजनाथ की सवारी निकलना प्रारंभ हुई जिसने आज क्षेत्र के सबसे बड़े आयोजन का रूप ले लिया है। सन् १९८० से यहां मासि? शिवरात्रि ?? जागरण निरतंर चल रहा है। सन् १९८२ में मंदिर परिसर में अखण्ड रामायण पाठ शुरू हुआ जो आज भी अनवरत जारी है।
११ वी सदी का है यह बैजनाथ धाम
इंदौर-कोटा राजमार्ग पर नगर से चार किमी दूर बेटखेड़ा की प्राकृतिक सुरम्य स्थली पर स्थित बाबा बैजनाथ के इस मंदिर में हालांकि पूरे वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है। महाशिवरात्रि एवं सावन में यहां श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में परिवर्तित हो जाती है। मंदिर में विराजित बाबा बैजनाथ महादेव की जीवतंतता से यह स्थल बैजनाथ धाम के नाम से विख्यात होने लगा है। मंदिर की उत्पत्ति विभिन्न विद्वानों के अनुसार सैकड़ों वर्ष पुरानी मानी जाती है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को दसवी-ग्यारहवी सदी का मानते हुए इतिहासकारों द्वारा इसे मौढ़ वैश्यो द्वारा निर्मित बताया गया है।
५० हजार श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
प्रबंध समिति तथा प्रशासन द्वारा शिवरात्रि के दिन करीब ५० हजार से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान जताया जा रहा है और इसी संख्या के अनुरूप मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं जुटाई जा रही है। मंदिर रंगाई-पुताई से लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप प्रबंध किए जा रहे है। यज्ञशाला का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है। विद्युत साज सज्जा एवं अन्य साज सज्जा की तैयारियां आरंभ हो चुकी है। लोगों को यहां आने पर असुविधाएं न हो इसलिए हर पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। तथा सुरक्षा को लेकर भी मंदिर में सुचारू इंतजाम किए जाएंगे।
जीर्णोद्धार के लिए अंग्रेज ने की थी पहल
जनप्रचलित किवंदति के अनुसार पूरे भारतवर्ष में बाबा बैजनाथ का ही एक मात्र ऐसा मंदिर है जिसका जीर्णोद्धार अंग्रेज शासनकाल के कर्नल मार्टिन की पहल पर किया गया इस विषय में प्रचलित धारणा के अनुसार सन् १८८० में अंग्रेज फौज काबुल के युद्ध में गई थी उसमें कर्नल मार्टिन भी गया था जब वो बहुत दिनों तक वापस नहीं आया तो उसकी पत्नी ने बैजनाथ स्थल पर कामना की कि यदि उसका पति युद्ध से सकुशल वापस आ गया तो मंदिर का निर्माण कराऊंगी। लड़ाई खत्म होने के कुछ समय बाद कर्नल मार्टिन आगर स्थित अंग्रेजी छावनी में लौट आया तो पत्नी ने उसे बाबा बैजनाथ की मानता के संदर्भ में बताया जिस पर कर्नल माॢटन ने तत्कालीन दौर में जनसहयोग से ग्यारह हजार रुपए एकत्रित कर १८८३ में मंदिर का जीणोद्धार कराया।
" महाशिवरात्रि पर्व को लेकर हमारे द्वारा प्रारंभिक तैयारियां प्रारंभ की जा चुकी हैं। मंदिर परिसर में रंगाई-पुताई का कार्य किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग को बैरीकेड्स लगाने एवं स्वास्थ्य विभाग का एक स्वास्थ्य दल को ५ दिनो के लिए तैनात करने को कहा गया है। "
मुकेश सोनी, तहसीलदार एवं पदेन सचिव प्रबंध समिति बैजनाथ धाम
Published on:
06 Feb 2018 07:30 pm
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