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रामदास त्यागी महाराज ब्रह्मलीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

नगर के श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में निवासरत रामदास त्यागीजी महाराज सोमवार सुबह 10 बजे ब्रह्मलीन हो गए।

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नगर के श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में निवासरत रामदास त्यागीजी महाराज सोमवार सुबह 10 बजे ब्रह्मलीन हो गए।

नलखेड़ा. नगर के श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में निवासरत रामदास त्यागीजी महाराज सोमवार सुबह 10 बजे ब्रह्मलीन हो गए। उनके निधन का समाचार जैसे ही नगर मे फैला शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई गुरुदेव के अंतिम दर्शन के लिए मंदिर की ओर पहुंचने लगा। महाराज चार दिन से बीमार थे। इस दौरान उपचार के लिए आगर एवं इंदौर ले जाया गया। इसके बाद वापस श्री गुप्तेश्वर आश्रम पर लाया गया। यहां सोमवार सुबह 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। गुरुदेव की अंतिम यात्रा में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। अंतिम यात्रा में गुरुदेव की पार्थिव देह को एक पालकी (डोल) में बैठाया गया। इसके बाद पूरे नगर भ्रमण के बाद बगुलामुखी मंदिर के पास गुरुदेव को मुखाग्नि दी गई।
नगर सहित आसपास के क्षेत्र रहे बंद-नगर के 25 किमी दूर राजगढ़ जिले के छापीहेड़ा में गुरुदेव के अनेक भक्त होने से यहां पर जैसे ही गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने की जानकारी मिली वैसे ही पूरा नगर बंद हो गया। अंतिम यात्रा में नलखेड़ा सहित छापीहेड़ा, आगर, सुसनेर, शुजालपुर, उज्जैन, सामरी, पिलवास, सहित अनेक ग्रामों के लोग शामिल हुए।
30 वर्षों से नहीं ग्रहण किया था अन्न-महाराज ने अपने जीवन के करीब 30 वर्षों से ज्यादा समय तक अन्न ग्रहण नहीं किया। वे केवल फलाहार ही लेते थे जिसे वे स्वयं अपने हाथों से बनाते थे।
जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन
सुसनेर. हम जैसा अन्न खाएंगे वैसा हमारा मन होगा। इसलिए हमें अच्छा भोजन करना चाहिए।
यह बात ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि की नीलम दीदी ने कही। वे सेवा केंद्र पर हुए ब्रह्म भोज में बोल रही थी। बडऩगर से आईं नीलम दीदी, इकलेरा से वीणा दीदी, पाटन से नंदिनी दीदी, सोयत से उत्तरा दीदी, संजना दीदी मौजूद थीं।
दीदी ने कहा भोजन का हमारे दिमाग पर भी असर होता है। इसलिए घर में जब भी महिलाएं भोजन बनाएं तो वह परमात्मा की याद करते हुए बनाएं। इससे हमारे परिवार के वह सभी लोग जो भोजन करें, उनकी सोच सकारात्मक हो। साथ ही घर में सुख-शांति व संपन्नता बनी रहे।
वीणा दीदी ने होली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि होली मनाने के साथ हमें बुराइयों का त्याग करना चाहिए। यदि हम बुराइयों का त्याग करते हैं तो निश्चित रूप से हम होली मनाते हैं, वही होलिका व प्रहलाद की कहानी भी सुनाई।
आज का युग महिलाओं का युग है, वहीं महिलाओं को बराबरी करनी चाहिए परंतु पड़ोसियों के भौतिक साधनों को ध्यान में रखते हुए नहीं परंतु सकारात्मक सोच के साथ बराबरी करना चाहिए। यह बात महिला दिवस के बारे में पाटन से आई नीलम दीदी ने कही। भाजपा नेता डॉ. गजेंद्रसिंह चंद्रावत, गिरजाशंकर राठौर, शैलेंद्र सिंघई, रूपनारायण श्रीवास्तव, कपिल लड्ढा, महेंद्र लड्ढा, इंदिरा गर्ग, अर्चना जोशी, सावित्री हरदेनिया मौजूद थे।