
किसानों को फसल का उत्पादन एवं नुकसानी आकलन दर्ज करवाने के लिए अब दर-दर की ठोकर नहीं खाना होगी।
दुर्गेश शर्मा . आगर-मालवा
किसानों को फसल का उत्पादन एवं नुकसानी आकलन दर्ज करवाने के लिए अब दर-दर की ठोकर नहीं खाना होगी। उनकी सहूलियत को दृष्टिगत रखते हुए शासन ने फसल नुकसानी एवं उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली मोबाइल गिरदावरी रिपोर्ट के माध्यम से अब सीधे किसान ही जानकारी प्रस्तुत कर सकेंगे। इसका सत्यापन हलका पटवारी द्वारा किया जाएगा। प्रक्रिया से किसानों का समय भी बचेगा और बेवजह चक्कर नही लगाने पड़ेंगे।
किसानों की फसल की जानकारी गिरदावरी रिपोर्ट प्रक्रिया के अंतर्गत पटवारी किसानों के खेतों में जाकर तैयार करते थे। प्रक्रिया में समय व संसाधन दोनों का काफी अपव्यय होता था और रिपोर्ट शासन स्तर पर प्रस्तुत करने में महीनों गुजर जाते थे। प्रक्रिया में बदलाव के बाद किसानों को काफी लाभ मिलेगा। समय भी बचेगा और काम भी तेज गति के साथ होगा। किसान फसल का घोषणा पत्र भरेगा जिसका सत्यापन संबंधित पटवारी करेगा और जानकारी भू-अभिलेख में दर्ज हो जाएगी। समय पर जानकारी भू-अभिलेख में दर्ज हो जाने से किसान को शासन की योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ भी समय पर मिलेंगे। पुरानी प्रक्रिया में देखा जा रहा था प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी कारण से फसल नष्ट हो जाने पर किसानों को समय पर न तो मुआवजा मिल पा रहा था और न ही बीमा योजना का लाभ। सबकुछ ठीक रहा और योजना का धरातल पर क्रियान्वयन तरीके से हो गया तो इसके दूरगामी परिणाम आशाजनक दिखाई देंगे।
ऑनलाइन होगा आवेदन
कोई भी किसान स्वयं घोषणा द्वारा अपनी भूमि पर उगाई गई फसलों की जानकारी किसान कॉल सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकता है। जानकारी प्रस्तुत किए जाने के बाद पटवारी किसान के स्व-घोषणा पत्र का सत्यापन कर जो भी आवश्यक संशोधन होगा वो कर अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रेषित कर देगा।
यह है गिरदावरी प्रक्रिया
फसल गिरदावरी प्रतिवर्ष की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो वर्ष में दो बार खरीफ एवं रबी सीजन की बोवनी के बाद की जाती है और इसे भू-अभिलेख में दर्ज किया जाता है। इसी जानकारी के आधार पर फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई एवं बैंक ऋण योजनाओं के लाभ लेने जैसे महत्वपूर्ण कार्य इस प्रक्रिया से होते हैं। प्रचलित पद्धति में कई बार जानकारी समय पर अद्यतन नहीं होने के कारण या फिर गलत हो जाने पर किसान लाभ से वंचित रह जाता है।
शासन ने मोबाइल गिरदावरी की प्रक्रिया में परिवर्तन किया है। किसानों की सहूलियत को दृष्टिगत रखते हुए किसानों को ही रिपोर्ट अपडेट करने के अधिकार दिए जा रहे हैं। फिलहाल लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। योजना शीघ्र ही आने वाली है।
राजेश सरवटे, अधीक्षक भू-अभिलेख आगर
Updated on:
19 Jul 2018 01:06 am
Published on:
19 Jul 2018 10:00 am
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