
पकड़े गए आरोपों के साथ पुलिस टीम फोटो सोर्स विभाग
आगरा में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जिस शॉप में हुई चोरी के बाद उसी इवेंट को लाखों की रंगदारी की साजिश रची के रूप में पेश किया गया। ऑफलाइन ऐप और फर्जी नंबरों के जरिए धमकियां दी जा रही थीं। थाना मलपुरा पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर उनके पास से कार, मोबाइल और अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
यूपी के आगरा जिले में 28 फरवरी 2026 को सामने आया। जब ककुआं के रहने वाले प्रमोद कुमार अग्रवाल ने थाना मलपुरा में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 19 फरवरी की रात उनकी ज्वेलरी दुकान में सोना-चांदी के सामान की चोरी हुई थी। चोरी के कुछ दिन बाद 23 फरवरी से उनके और परिवार के सदस्यों के मोबाइल पर अलग-अलग नंबरों से जान से मारने की धमकियां आने लगीं। कॉल करने वाले बड़ी रकम की मांग कर रहे थे।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। 3 मार्च को गठित टीम ने मुखबिर की सूचना पर जखौदा पुल के नीचे से चार युवकों को दबोच लिया। उनके पास से सफेद रंग की स्विफ्ट कार, छह मोबाइल फोन और एक कॉपी बरामद हुई। पूछताछ में मुख्य आरोपी गौरव शर्मा ने बताया कि वे लोग चोरी की घटना के बाद ज्वेलर की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। पहचान छिपाने के लिए वीपीएन, वर्चुअल नंबर और अलग-अलग कॉलिंग ऐप का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपियों ने 12.5 करोड़ रुपये की कथित रकम का 20 प्रतिशत हिस्सा देने की मांग की थी।
गैंग के सदस्य हृदयेश और धीरज सिंह स्क्रिप्ट तैयार करते थे। धीरज इंटरनेट की मदद से उसे भोजपुरी में बदलता और उसी के आधार पर धमकी भरे कॉल किए जाते। बाद में सबूत मिटाने के लिए लिखे कागज नष्ट कर दिए जाते थे। मोबाइल जांच में फर्जी वीडियो, धमकी संदेश और ऑडियो क्लिप भी मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, चारों पर कर्ज था और पैसे की तंगी के कारण उन्होंने यह साजिश रची। फिलहाल सभी आरोपियों को जेल भेजा गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
Updated on:
02 Apr 2026 02:14 pm
Published on:
05 Mar 2026 07:04 am
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