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एक कंबल में खत्म मिलीं तीन पीढ़ी, पढ़िए दिल हिला देने वाली खबर

ऋषिकेश में गंगा किनारे मिले तीनों शव की हुई पहचान, चांदी कारोबारी, बेटा और 12 वर्षीय नाती के थे शव

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आगरा

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Abhishek Saxena

Mar 24, 2018

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आगरा। पारिवारिक कलह से तंग आकर तीन पीढ़ी खत्म हो गईं । कारोबारी ने ऋषिकेश में जाकर सुसाइड कर लिया। तीनों के शव एक कंबल में मिले। सुसाइड करने से पहले अपने मन को शांत करने की बहुत कोशिश की गई होगी। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिता लखनलाल अपने बेटे और पौत्र के साथ तीर्थस्थलों पर गए ताकि मन शांत हो सके। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। तीनों के शव गंगा किनारे मिले।

टी शर्ट पर लगे टेलर के टैग से पहचान
शव की शर्ट पर आगरा के टेलर का टैग मिला था। जिसके बाद आगरा की पुलिस से संपर्क किया गया। टेलर ने पहचान की और परिवार को सूचित किया। इस खबर के बाद रिश्तेदार और पड़ोसी सन्न हैं। परिवारीजन शव लेने के लिए ऋषिकेश रवाना हो गए हैं। तीनों के शव का आज पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा।

बताया गया है कि उत्तराखंड के ऋषिकेश में शुक्रवार की सुबह गीता भवन घाट नंबर 1 पर एक कंबल में तीन शव मिले थे। इसमें से एक शव की शर्ट के कॉलर पर मनोज टेलर नगला पदी आगरा लिखा था। ऋषिकेश पुलिस ने आगरा पुलिस से संपर्क किया और तीनों के फोटो व्हाट्सएप किए। इसके बाद थाना न्यू आगरा पुलिस तीनों मृतकों के फोटो लेकर मनोज टेलर के पास पहुंची। यहां स्थानीय लोगों ने उनकी पहचान आगरा के न्यू आगरा क्षेत्र में जागेश्वर नगर की गली नंबर पांच निवासी चांदी कारोबारी लखन लाल वर्मा, उनके बेटे और नाती के रूप में की। शुक्रवार देर रात न्यू आगरा पुलिस के साथ स्थानीय लोग लखन लाल वर्मा के घर पहुंचे।

पुलिस को शव के पास से मिला ये सामान
ऋषिकेश पुलिस को शवों के पास से 10,045 रुपये नगद, वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड की पर्ची, हरि की पौढ़ी में किए दान की पर्चियां बरामद हुई हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मरने वालों के मुंह और नाक से झाग निकला रहे थे। वहीं गुरुवार रात तीनों गीताभवन आश्रम में कमरा लेने गए थे लेकिन कोई पहचान पत्र साथ न होने से उन्हें कमरा नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने गीता भवन से दो कंबल किराए पर लिए और घाट पर जाकर सो गए थे।

सभी निकले थे साथ साथ
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लखनलाल वर्मा के तीन बच्चे थे। दो बेटे और एक बेटी। बेटा सुमित, दीपक और बेटी ज्योति थी। यह परिवार 25 साल पहले माईथान से जागेश्वर नगर आया था। छह महीने पहले ही मकान को दोबारा बनवाया था। लगभग पांच साल पहले बड़े बेटे सुमित की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। वह विवाहित था। उसकी ससुराल भरतपुर में थी। सुमित की मौत ससुराल में ही हुई थी। उसकी मौत के बाद बहू ने ससुरालीजनों पर केस कर दिया। खुद दूसरी शादी रचा ली। सुमित का बेटा हर्ष बाबा के साथ रहता था। बाबा और चाचा का दुलारा था। वह उसे अकेला नहीं छोड़ते थे। हर्ष की परवरिश के चक्कर में दीपक ने अपनी शादी नहीं की थी।

बेबी को लगा सदमा, बिगड़ गया मानसिक संतुलन
बताया गया है कि लखन लाल वर्मा की पत्नी बेबी बड़े बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं। दिमागी संतुलन बिगड़ गया। किसी पर भरोसा नहीं करती हैं। पति और बेटा उनकी हरकतों से परेशान थे। उन्हें समझाया करते थे।