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AGRA INTERVIEW : माता – पिता से बात करके ही घर से निकलता हूं – डीसीपी सोनम कुमार

ताजनगरी आगरा में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद पुलिसिंग में आए बदलाव के बारे में संवाददाता ने डीसीपी वेस्ट सोनम कुमार से विशेष बातचीत की। सोनम कुमार ने पुलिसिंग को लेकर हर सवाल के जवाब दिए।

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आगरा

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Avinash Jaiswal

Jun 17, 2023

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2016 बीच के डीसीपी सोनम कुमार मूलतः बिहार के निवासी हैं पर उनका जन्म दिल्ली में हुआ और वहीं उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। संगीत और कंप्यूटर सर्फिंग के शौकीन सोनम कुमार मुरादाबाद, लखनऊ, गोरखपुर, संतकबीरनगर में अपने अच्छे काम से जनता के बीच अलग पहचान बना चुके हैं। वर्तमान में आगरा में डीसीपी वेस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद आगरा में अब सभी तेज तर्रार आईपीएस आफिसर कमान संभाल रहे हैं। जनता को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था और किसी घटना पर तत्काल न्याय मिले इसके लिए तरह - तरह के उपाय किए जा रहे हैं। वर्तमान में पीड़ित को अपनी बात रखने के लिए अधिकारियों के पास आने की जरूरत भी नहीं है। लोग ऑनलाइन सीधे अधिकारियों से वीडियो काल पर अपनी शिकायत बता सकते हैं। आज पुलिस सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपराधियों तक पहुंचने में सक्षम है। आम जनता का पुलिस पर विश्वास कई गुना बढ़ा है और अब लोग जरूरत पड़ने पर थाने जाने से डरने की बजाय अपने अधिकारों को जान रहे हैं। पुलिस जनता के बीच मैत्री व्यवहार साफ देखने को मिल रहा है।

कमिश्नरेट लागू होने पर क्या बदलाव है?

पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस की शक्तियां बढ़ी हैं। आईपीएस अधिकारियों की तैनाती के कारण मॉनिटरिंग काफी बढ़ गई है। अपराधों के खुलासे जल्दी हो रहे हैं। जनता का पुलिस पर विश्वास बढ़ा है।

टीम लीडर की जिम्मेदारी कितनी बढ़ी है?
जिम्मेदारी काफी बढ़ गई हैं। अपराध के खुलासे के वक्त काफी पेशेंस रखना पड़ता है, हमारी कोशिश रहती है की टीम से कोई गलत काम न हो और पुलिस की छवि साफ रहे।

आगरा का कौन सा अपराधिक मामला आपको हमेशा याद रहेगा

सैयां क्षेत्र में अपराधी पीड़ित से स्कूटी और पैसे लेकर फरार हुए थे। आरोपी राजस्थान के होने की सूचना मिलने पर राजस्थान तक गए और बाद में आरोपी सैयां में ही मिले और हमारे आपरेशन में आरोपी गिरफ्तार किए गए।

सुनवाई के दौरान सही और गलत की पहचान कैसे करते हैं ?

दोनों पक्षों से बात करने और शिकायत करने वाले की बॉडी लैंग्वेज देखकर समझ आ जाता है की कौन सही है, पर फिर भी बिना भौतिक जांच के कोई फैसला नहीं लिया जाता है।

एक आईपीएस के व्यस्त शेड्यूल में परिवार को कैसे मैनेज करते हैं?

रोजाना का रूटीन बना कर रखते है। परिवार में माता - पिता ,बहन और पत्नी हैं। माता - पिता दिल्ली में रहते हैं। रोजाना सुबह सबसे पहले माता - पिता से बात करते हैं और मौका मिलते ही उनके पास जाकर उनके साथ समय बिताते हैं। हर काम के लिए समय का निर्धारण करके दिनचर्या शुरू करते हैं।

कभी काम के दौरान राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ा?

आज तक कभी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, आज के दौर में सोशल मीडिया और मीडिया इतना आगे बढ़ चुका है की ऐसा होना भी मुश्किल है।

कभी किसी अपराधी को जेल भेजकर उसके बारे में सोचा हो?

जो भी अपराधी पकड़ा जाता है ,उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत और उसके अपराध की पुष्टि होने पर ही कार्रवाई की जाती है। दोषी को जेल भेजना और उसके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई करना ही पुलिस का काम है।

टीम लीडर होकर टीम के साथ कैसे ट्रीट करते हैं?

सभी को परिवार का हिस्सा मानते हैं और पुलिस विभाग अनुशासित विभाग है यहां कोई भी व्यक्ति कभी गलत व्यवहार नहीं करता है और सब निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।