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अटल जी के पैतृक गांव में लगने वाला प्रसिद्ध बटेश्वर मेला इस बार होगा खास, जानिए वजह

उत्तर भारत का मशहूर बटेश्वर पशु मेला पुष्कर मेले से भी पुराना है। मुगलिया काल के दौरान बादशाह अकबर इसी मेले से ऊंट घोड़े आदि जानवरों की खरीदारी करते थे।

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आगरा

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Amit Sharma

Oct 23, 2018

आगरा। योगी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के पैकृक गांव में हर साल लगने वाले उत्तर भारत के ऐतिहासिक बटेश्वर मेले को पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायद शुरू कर दी है। इस बार यह मेला पुराने स्वरूप में तो होगा ही साथ ही आधुनिकता की चादर इस मेले के स्वरूप को बेहद ही मनमोहक बनाएगी।

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ब्रज संस्कृति की दिखेगी झलक
जिला पंचायत अध्यक्ष कार्यालय में बटेश्वर मेले की तैयारियों और स्वरूप को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश बघेल, टूरिज्म गिल्ड, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत और जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे। इस बैठक में बटेश्वर मेले को पुराने स्वरूप में लौटाने और उस में आधुनिकता का रंग भरने के लिए तमाम बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ। इस बार बटेश्वर मेला प्लास्टिक फ्री जोन घोषित होगा। इसके साथ ही मेले में विदेशी पर्यटकों को लाने के लिए एक वेबसाइट लांच की जाएगी। पांच नवंबर से शुरू होने वाले मेले मैं 23 दिन महा आरती का आयोजन होगा। हर दिन एक जनप्रतिनिधि या पुलिस प्रशासनिक अधिकारी को महा आरती का मुख्य अतिथि घोषित किया जाएगा। बटेश्वर मेले को भव्य रूप प्रदान करने के लिए सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन कराया जाएगा जिसमें कवि सम्मेलन भगत ब्रज संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रम सहित तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मुगलकाल से भी पहले का है इतिहास
आपको बता दें कि उत्तर भारत का मशहूर बटेश्वर पशु मेला पुष्कर मेले से भी पुराना है। मुगलिया काल के दौरान बादशाह अकबर इसी मेले से ऊंट घोड़े आदि जानवरों की खरीदारी करते थे। विगत वर्षों में इस मेले का स्वरूप बिगड़ता गया है। मेले को पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायद जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल शुरू की है। मेले को भव्यता प्रदान करने के लिए इसी सप्ताह सर्किट हाउस में बैठक की जाएगी। इस मेले को टूरिज्म मैप से जोड़ने के लिए वेबसाइट लांच की जाएगी जिसमें बटेश्वर मेला, सॉरीपुर जैन मंदिर, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के गांव का भी उल्लेख होगा। इसके साथ ही चंबल सफारी के उल्लेख के साथ ही बटेश्वर मेले में होने वाले सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों का वर्णन भी किया जाएगा।