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आगरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथआगरा में हैं। वे तूफान पीड़ितों का हाल जानने आए हैं। इसके साथ ही महानगर एवं जिले के 1250 टेदारों ने अपनी मांगों के समर्थन में पांच मई से हड़ताल शुरू कर दी है। जिले के 7.50 लाख राशनकार्ड धारकों को सस्ता गेहूं और चावल नहीं नहीं मिलेगा। आगरा शहर में 450 राशन दुकानों पर 2.50 लाख राशनकार्ड हैं। गरीबों को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल मिलता है। इसका वितरण हर माह क पांच तारीख से शुरू होता है।
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पांच माह बाद भी मांग नहीं हुई पूरी
ऑल फेयर प्राइज शॉप डीलर्स एसोसियशन के आह्वान पर शुक्रवार को पालीवाल पार्क पर एक बैठक कर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया था। बताते चलें कि आज से तीन माह पूर्व भी कोटेदारों ने अपनी सात सूत्री मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। हड़ताल को खत्म करने के लिए खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मार्च तक कोटेदारो की सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था। पांच माह बाद भी मांगें पूरी न होने पर कोटेदारो ने एक बार फिर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत गरीब परिवारों को सस्ते मूल्य के अनाज का वितरण माह की पाँच तारिख से प्रारंभ हो जाता है। कोटेदारों के हड़ताल पर जाने से लाखों परिवारों को अनाज के संकट का सामना करना पड़ेगा।
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क्या है समस्या
ऑल फेयर प्राइज शॉप डीलर्स एसोसियशन एसोसियशन के महानगर अध्यक्ष अनिल चक्रवर्ती ने बताया कि राशन कोटेदार शासन की मंशा के अनुरूप बायोमेट्रिक प्रणाली से सभी कार्डधारकों को सस्ते खाद्यान्न का वितरण कर रहे हैं। समय-समय पर शासन के आदेशों का पालन कर कोटेदार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है। बावजूद इसके विभाग द्वारा लगातार कोटेदारों की मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। चक्रवर्ती के अनुसार शासन स्तर से अभी तक कोटेदारों की कमीशन में वृध्दि नहीं की गई है। अभी हाल में कोटेदारों को प्रति कुंटल 70 रुपये की कमीशन दी जा रही है। इस कमीशन में कोटेदारों को अपने खर्चे पर गोदाम से खाद्यान्न का उठान करना पड़ता है। इस तरह प्रति कुंटल 60 रुपये का खर्चा माल भाड़े में ही खर्च हो जाता है। जबकि शासन के आदेश के बाद अभी तक डोर टू स्टेप डिलीवरी भी शुरू नहीं की जा सकी है। माल के उठान के समय खाली बोरी का वजन अलग से नहीं दिए जाने के कारण प्रति बोरी लगभग दो किलो वजन कम माल दिया जाता है। कैरोसिन के 200 लीटर के ड्राम में भी 5-6 लीटर कम माल मिलने से कोटेदारों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रॉक्सी सिस्टम पर संकट के बादल
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कुछ मानक हैं, जिसके द्वारा गरीब परिवारों के घर तक 2 रुपये प्रति किलो गेंहू व 3 रुपये किलो चावल का वितरण किया जाता है। इसमें प्रति यूनिट 3 किलो गेंहू व 2 किलो चावल देने का प्रावधान है। माह की 5 तारीख से जिले व महानगर की दुकानों पर खाद्दान्न का वितरण शुरू किया जाता है। सर्वप्रथम ई-पॉश मशीन से बायोमेट्रिक सिस्टम के तहत कार्डधारक का अंगूठा मैच कराकर उसे अनाज दिया जाता है। इसके बाद माह के अंतिम दिनों में शासन के आदेशानुसार जिन कार्डधारकों के अंगुलियों के निशान मैच नहीं करते हैं अथवा जिनका आधार कार्ड लिंक नही हुआ है, ऐसे धारकों की आईडी प्रूफ जमा कराकर अनाज देने का प्रावधान है। बताते चले कि माह अप्रैल में कोटेदारो ने प्राक्सी सिस्टम से कार्डधारकों को अनाज का वितरण नहीं किया था। सूत्रों की मानी जाए तो नवागत जिलापूर्ति अधिकारी के सख्त आदेशों से नाराज कोटेदारों ने प्रॉक्सी न करने का निर्णय लिया। इससे हजारों परिवारों को माह अप्रैल के खाद्यान्न से वंचित होना पड़ा था। कोटेदारों द्वारा 5 मई से शुरू हुई हड़ताल से लाखों कार्डधारकों के सामने एक बार फिर संकट खड़ा होने जा रहा है।
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Published on:
05 May 2018 08:56 am
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