शीतगृह स्वामी भंडारण दर 1998 की कमेटी के नियम लागू कराने की मांग कर रहे
आगरा। आलू किसान समर्थन मूल्य न मिलने से परेशान है। आलू किसान को राहत देने में सरकार नाकाम रही है। आगरा में किसानों का आलू सड़कों पर फेंका गया, तो राजधानी में विधानसभा के सामने किसानों ने आलू फेंका। आलू किसानों के लिए आलू किसान नेताओं ने कई नीतियों के लिए मांग की है। राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर ने बताया कि खंदौली में हुई आलू किसानों की समस्याओं के लिए महापंचायत में प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजे गए हैं।
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आलू किसानों के लिए ये हैं प्रस्ताव
- जनवरी 2018 के महीने के अंत में आलू के लाभप्रद समर्थन मूल्य की घोषणा कर फरवरी के दूसरे सप्ताह में आलू की सरकारी खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- शीतगृह भंडारण दर वर्ष 1998 से पहले की व्यवस्थानुसार सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों किसान शीतगृहसवामी की कमेटी द्वारा तय की जाए और इस दर की घोषणा हर हाल में फरवरी महीने के प्रथम सप्ताह में कर दी जाए। आलू उत्पादन में प्रदेश के अग्रणी जनपदों, आगरा, मथुरा, हाथरस , अलीगढ़ , फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हापुड़, मेरठ आदि में आलू प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जाए।
- आलू को अन्य प्रदेशों में भेजने पर दी जाने वाली ट्रांसपोर्ट सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाए, ताकि अधिकारी व्यापारी गठजोड़ की लूट रुक सके।
- ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्तओं पर बढ़ाई गई विद्युत दर अविलंब वापस ली जाए। नहर का पानी रोस्टर के अनुसार आपूर्ति ना होने पर किसान को होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई सरकार करे।
- आवारा पशुओं से फसलों के हो रहे नुकसान की शासन भरपाई करे। ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्तओं पर बढ़ाई गई विद्युत दर अविलंब वापस ली जाए।
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