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दीपावली पर अमावस्या का समय है कम, चौघडिया मुहुर्त में करें दीपावली पूजन, ये है शुभ मुहुर्त

बृज में दीपावली पर चौघडिया मुहुर्त की है विशेष मान्यता, ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने बताया शुभ मुहुर्त

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आगरा

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Abhishek Saxena

Nov 02, 2018

aaj ka muhurat

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आगरा। दीपोत्सव का पर्व शुरू होने में अब कुछ दिन ही शेष रह गए हैं। बुधवार को पड़ने वाली दीपावली पर गणेश और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और यमुना नदी के बिना दीपोत्सव पर्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस बार दीपोत्सव के महापर्व पर ज्योतिषाचार्य और भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने पत्रिका के सुधी पाठकों को ऐसा शुभ मुहुर्त बताया है जिसमें पूजन करना सबसे श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है।

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अमावस्या पर इस समय है शुभ मुहुर्त
पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि इस बार दीपावली का महापर्व 7 नवंबर दिन बुधवार को पड़ेगा। लेकिन, इस बार दीपावली के दिन अमावस्या तिथि रात्रि 9 बजकर 32 मिनट तक ही रहेगी। इसलिए रात्रि में दीपावली के दिन पूजा का शुभ चौघडिया का मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से लेकर रात्रि 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। दीपावली की रात्रि में अमावस्या तिथि में ही दीपावली पूजन करना अनिवार्य होता है। इस बार अमावस्या तिथि रात्रि 9 बजकर 32 मिनट तक ही है, इसलिए इस बार का दीपावली पूजन रात्रि 9 बजकर 32 मिनट तक सम्पूर्ण कर लें। जिसमें शाम 7 बजकर 37 मिनट तक दीपावली के दिन स्वाति नक्षत्र का संयोग भी प्राप्त हो जाएगा। दीपावली के दिन अमावस्या तिथि को स्वाती नक्षत्र का संयोग अति शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इस बार यह संयोग दीपावली के दिन 7 नवम्बर को शाम 7 बजकर 37 मिनट तक ही रहेगा। दीपावली के पूजन का शाम के समय एक अन्य लाभ के चौघडिया का शुभ महूर्त शाम 4 बजकर 8 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

कृष्ण ने उठाया था गोवर्धन
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि बृज क्षेत्र में श्रीकृष्ण ने दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पर्वत अपनी अंगुली पर उठाकर इंद्र के कोप से डूबते ब्रजवासियों को बचाया था। इसी दिन लोग अपने गाय-बैलों को सजाते हैं और गोबर का पर्वत बनाकर पूजा करते हैं। अगले दिन भाई दूज का पर्व होता है। दीपावली के दूसरे दिन व्यापारी अपने पुराने बहीखाते बदल देते हैं। वे दुकानों में लक्ष्मी पूजन करते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से धन की देवी लक्ष्मी की उन पर विशेष अनुकंपा रहेगी। कृषक वर्ग के लिये इस पर्व का विशेष महत्त्व है। खरीफ की फसल पक कर तैयार हो जाने से कृषकों के खलिहान समृद्ध हो जाते हैं। कृषक समाज अपनी समृद्धि का यह पर्व उल्लासपूर्वक मनाता हैं।