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स्ट्रोक से बच सकती है जान, बशर्ते ऐसे मिले इलाज

आगरा सर्राफा एसोसिएशन द्वारा गैर संचारी रोगों के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से आयोजित कराई गई गोष्ठी, जिला अस्पताल के डॉ. पियूष जैन ने डायबिटीज, हृदय रोग व स्ट्रोक जैसी बीमारियों से बचाव, इलाज व लक्षण पर दिया व्याख्यान

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आगरा

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Abhishek Saxena

Jul 04, 2018

stroke

स्ट्रोक से बच सकती है जान, बशर्ते ऐसे मिले इलाज

आगरा। स्ट्रोक यानि लकवा। ऐसी बीमारी है जिसके बारे में जागरुकता बहुत कम है। यदि समय पर इलाज मिले तो 89 फीसदी लोगों को विकलांग होने से बचाया जा सकता है। दुनिया में 60 लाख लोग हर साल स्ट्रोक से मरते हैं। 13-33 प्रतिशत युवा स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। चिन्ता की बात यह है कि बदलती जीवन शैली के कारण हर साल यह ग्राफ बढ़ रहा है। हृदय रोग व डायबिटीज जैसे रोगों के बारे में कुछ हद तक जागरूकता बढ़ी है, लेकिन स्ट्रोक के लक्षण और बचाव आदि के बारे में जानने वालों के प्रतिशत बहुत कम है।

आगरा सर्राफा एसोसिएशन की गोष्ठी
यह जानकारी गैर संचारी रोग के आगरा को-ऑर्डिनेटर डॉ. पियूष जैन ने अपने व्याख्यान में आगरा सर्राफा एसोसिएशन द्वारा नमक की मंडी स्थित गुरु कृपा प्लाजा में व्यापारियों को दी। अतिथियों का स्वागत आगरा सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नीतेश अग्रवाल ने किया। डॉ. पियूष ने बताया कि गलत जीवन शैली के कारण पहले 50 वर्ष में होनी वाली बीमारी का शिकार आज 20-25 वर्ष के युवा हो रहे हैं। जिला अस्पताल में हर माह 3-4 हजार मरीज एनसीडी (नॉन कम्यूनिकेबिल डिजीज जैसे डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर, स्ट्रोक) यानि गैर संचारी के पहुंच रहे हैं। जिसमें लगभग 40 फीसदी युवा हैं। 30 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जो एक से अधिक गैर संचारी रोगों से पीड़ित हैं। 60 फीसदी डायबिटीज से पीड़ित हैं। 30 प्रतिशत को ब्लड प्रेशर व 5 प्रतिशत को कैंसर है। यह वो समस्या है जिसे हम थोड़ी सी समझदारी से काफी हद तक कम कर सकते हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से आगरा सर्राफा एसोसिएशन के अशोक अग्रवाल, मनीष पारौलिया, मयंक अग्रवाल, नीरज जैन, संजय वर्मा, धीरज वर्मा, अशोक अम्बाह, आरजी अग्रवाल, विमल नयन फतेहपुरिया, प्यारेलाल खंडेलवाल, राजू मेहरा, सुनील वर्मा. कपिल बंसल आदि उपस्थित थे।

आगरा से शुरू हुआ अभियान पूरी यूपी को कर रहा जागरूक
डॉ. पियूष ने बताया कि स्ट्रोक के दौरान लगाए जाने वाला 50 हजार कीमत का इंजेक्शन जिला अस्पताल में फ्री है। लकवा मारने के चार घंटे के दौरान यदि यह इंजेक्शन मरीज को लगा दिया जाए तो 80 प्रतिशत लोगों को विकलांग होने से बचाया जा सकता है।

स्ट्रोक के लिए फास्ट कैम्पेन
FAST कैम्पेन यानि स्ट्रोक के लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक करना। इसके नाम में ही सभी जवाब छिपे हैं।

-F यानि फेस अचानक चेहरे पर टेढ़ापन होने लगे।

-A यानि आर्म (हाथ या पैर) में अचानक कमजोरी महसूस होने लगे।

-S यानि स्पीच। बोली में अस्पष्टता

-T यानि टाइम। इन तीन इन लक्षणों के 4 घंटे के अंदर मरीज का सही अस्पताल और सही डॉक्टर के हाथों इलाज जरूरी है।

ये हैं एनसीडी के मुख्य कारण

-किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन।

-युवावस्था में ही शराब पीना, वह भी अधिक मात्रा में।

-पिज्जा और बर्गर को खाने का विकल्प बनाना।

-शारीरिक व्यायाम न करना।