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डॉ. जयदीप ने दुनिया को बताया भारत में कैसे हो रहा आईवीएफ का विकास

- वियना में आयोजित दुनिया के सबसे बडे़ ह्यूमन रिप्रोडक्शन सम्मेलन में शामिल हुए आगरा के डॉक्टर- एशरे-2019 में पहली बार आयोजित हुआ भारतीय सत्र, डा. जयदीप के नेतृत्व को सभी ने सराहा

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आगरा

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Amit Sharma

Jul 03, 2019

आगरा। ताजनगरी के डॉक्टरों ने दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया है। इस बार फोग्सी की पूर्व अध्यक्ष और रेनबो हॉस्पिटल के निदेशख डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने भारत में आईवीफ और इससे जुड़ीं आधुनिक तकनीकों और परिस्थितियों के कुछ तथ्य दुनिया के सामने रखे। यूरोपियन सोसायटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एंब्रियोलॉजी एशरे-2019 में पहली बार एक भारतीय सत्र आयोजित हुआ, जिसका नेतृत्व डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने किया।

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भारत के 500 स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हुए
एशरे-2019 आईवीएफ और एंब्रियोलॉजी का दुनिया में सबसे बड़ा सम्मेलन है। इस बार यह वियना, ऑस्ट्रिया में 23 से 26 जून 2019 तक आयोजित हुआ, जिसमें पूरी दुनिया से लगभग 12000 और भारत से 500 स्त्री रोग, आईवीएफ विशेषज्ञ और एंब्रियोलॉजिस्ट शामिल हुए। इसमें आगरा से डॉ. जयदीप मल्होत्रा और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने भी सम्मेलन में शिरकत की और अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान दिये। सम्मेलन में पहली बार एक भारतीय सत्र आयोजित हुआ, जिसका नेतृत्व करते हुए डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने रिकरेंट आईवीएफ फेल्योर विषय पर प्रकाश डाला।

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अच्छे आईवीएफ केन्द्र का चुनाव करें
उन्हेंने कहा कि 40 साल पहले जब दुनिया में पहला परखनली शिशु पैदा हुआ तो निसंतान जोड़ों में आशा की किरण जगी कि अब संतान सुख के लिए निराश होने की जरूरत नहीं है, लेकिन आए दिन कई दंपतियों को बार-बार आईवीएफ करवाने के बावजूद विफलता हाथ लगने की शिकायतें रहती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि इसकी क्या वजहें होती हैं। अगर इन वजहों को जान लिया जाए तो आप एक अच्छे आईवीएफ केंद्र का चुनाव करते हैं जहां पारदर्शिता अधिक होती है, अच्छे उपकरण होते हैं, 24 घंटे भ्रूण की निगरानी की जाती है, अच्छे भ्रूण चुने जाते हैं आदि कई बिंदुओं के मिश्रण से गर्भधारण एवं संतान प्राप्ति की संभावना बढ़ जाती है।

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35 साल के बाद महिलाओं में अंडाणु बनने की क्षमता कम
डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज कॅरियर संवारने की ख्वाहिश रखने वाले युवा शादी करने या बच्चे पैदा करने में अक्सर देर कर देते हैं। कई बार यह देर बहुत अधिक हो जाती है। जबकि उम्र बढ़ने से पुरुष और महिलाओं दोनों के साथ संतानोत्पत्ति को लेकर समस्या पैदा होती है। 35 साल के बाद महिलाओं में अंडाणु बनने की क्षमता कम होने लगती है। इसी प्रकार पुरुष में शुक्राणुओं की गुणवत्ता भी आईवीएफ की सफलता के लिए अहम होती है।

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परीक्षा में शामिल हुए डॉ. सपना गांधी
सम्मेलन के अंतर्गत सर्टिफिकेशन ऑफ एंब्रियोलॉजी के लिए होने वाली परीक्षा में रेनबो हॉस्पिटल की डॉ. सपना गांधी शामिल हुईं। गत वर्ष यह परीक्षा रेनबो हॉस्पिटल के ही डॉ. केशव मल्होत्रा ने पास की थी। सम्मेलन में डॉ. जयदीप और डॉ. नरेंद्र के अलावा आगरा के कई अन्य चिकित्सक भी शामिल हुए।