
धूमधाम से हुये स्वागत के बाद घर घर विराजे गजानन, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्थ और गणेश कथा,गणेश चतुर्थी : शीघ्र इच्छा पूर्ति की विशेष गणेश पूजन विधि,गणेश चतुर्थी : शीघ्र इच्छा पूर्ति की विशेष गणेश पूजन विधि
आगरा। सोमवार को संपूर्ण देश के साथ ताजनगरी में भी गणेश चतुर्थी को धूमधाम के साथ मनाया गया। कमला नगर, प्रताप नगर, जयपुर हाउस समेत तमाम पॉश कॉलोनियों के साथ शहर के प्रमुख बाजारों राजामंडी सदर बाजार सहित लगभग 250 से अधिक पांडालों में गणपति का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत कर स्थापना की गई।
गणपति बप्पा मोरिया के जयघोषों से गूंजा शहर
आगरा की मानसनगर कॉलोनी में भी भगवान श्री गणेश की कई फीट ऊंची मूर्ति को ढोल नगाड़ों के साथ नगर भ्रमण कराया गया, जहां हर घर के आगे गृहस्वामी ने फूलमाला और मोदक आदि से गौरी पुत्र का स्वागत किया। नगर भ्रमण के दौरान रंग गुलाल भी उड़ाया गया। वहीं गणपति बप्पा मोरिया के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। नगर भ्रमण के दौरान कॉलोनी की महिलायें, बच्चे, बुर्जुग व युवा भी साथ रहे।
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बहेगी भक्ति की बयार
पिछले कई दिनों से सजाये जा रहे इन पांडालों में गणपति की स्थापना के बाद लगातार दस दिन तक पूजा अर्चना, आरती आदि कर विघ्नविनाशक को मनाया जायेगा। वहीं हर दिन अलग अलग भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जायेगा।
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युवाओं में जोश
गणपति उत्सव को लेकर युवाओं में भी अलग ही जोश नजर आ रहा है। कई दिनों से गणपति उत्सव का इंतजार कर रहे युवाओं ने जगह जगह पर बड़े बड़े स्पीकर और साउंड सिस्टम आदि लगायें हैं। जिस पर सुबह शाम गणपति वंदना आरती और गणपति पर आधारित फिल्मी गाने बजाये जाने की तैयारियां हैं।
पूजा का शुभ महूर्त और महत्व
आचार्य लक्ष्मी नरायण शास्त्री ने बताया कि अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ कर पूजा करें। आसन कटा-फटा नहीं होना चाहिए। साथ ही पत्थर के आसन का इस्तेमाल न करें। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को किसी लकड़ी के पटरे या गेहूं, मूंग, ज्वार के ऊपर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक स्वरूप एक-एक सुपारी रखें।
कैसे हुई गणेश भगवान के उत्पत्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता पार्वती स्नान करने से पहले चंदन का उपटन लगा रही थीं। इस उबटन से उन्होंने भगवान गणेश को तैयार किया और घर के दरवाजे के बाहर सुरक्षा के लिए बैठा दिया। इसके बाद मां पार्वती स्नान करने चली गई। तभी भगवान शिव अपने घर पहुंचे वह घर में प्रवेश करने ही वाले थे कि भगवान गणेश ने उन्हें घर में जाने से रोक दिया। भगवान शिव ने गणेश को उनका रास्ता छोड़ने की चेतावनी दी।जब भगवान शिव के कई बार कहने पर गणेश ने उन्हें अंदर नही जाने दिया तो भगवान शिव ने क्रोधित होकर त्रिशुल के प्रहार से गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। मां पार्वती को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुईं। उन्हें शांत करने के लिये भगवान विष्णु उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले हाथी का सिर काटकर ले आये और गणेश भगवान के धड़ से लगाकर उन्हें पूनर्जीवित किया। माता पार्वती ने गजमुख गणेश को खुश होकर हदय से लगा लिया। भगवान ब्रहमा,विष्णु और महेश ने बालक को वरदान दिया। मान्यताओं के अनुसार यह घटना चतुर्थी के दिन ही हुई थी। इसलिए इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
Updated on:
02 Sept 2019 08:02 pm
Published on:
02 Sept 2019 08:00 pm
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