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शोध छात्रा से रेप, पेपर कटर से गला काटा; न्याय के लिए क्या करें बेबस पिता?

आगरा में दस साल पहले रेप के बाद पेपर कटर से गला काटकर की गई शोध छात्रा की हत्या के दस साल बीत चुके हैं। इस मामले में अभी तक पीड़ित पिता कोर्ट के चक्कर काट रहा है।

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आगरा

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Vishnu Bajpai

Mar 17, 2023

 Rape with girl in Agra

शोध छात्रा हत्याकांड से पहले की तस्वीर

आगरा के दयालबाग में मार्च 2013 को एक शोध छात्रा की रेप के बाद पेपर कटर से गला काटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद आगरा की सड़कों पर उतरकर लोगों ने आरोपियों को गिरफ्तार करने की पुरजोर मांग उठाई। बवाल और हंगामे के बाद पुलिस ने संस्‍थान के एक छात्र समेत दो लोगों को जेल भेज दिया। बाद में यह मामला सीबीआई के पास चला गया। जो अब कोर्ट में विचाराधीन है। अब आइए आपको पूरी घटना से रू-बरू कराते हैं…

मूलरूप से दिल्ली निवासी छात्रा आगरा के दयालबाग के एक शिक्षण संस्थान से बीटेक कर रही थी। वह शोध भी कर रही थी। 15 मार्च 2013 को उसे संस्थान की लैब में पेपर कटर से गला काटकर मारा गया था। शव लैब में पड़ा मिला था। संस्‍थान से थोड़ी दूर ही छात्रा की कार मिली थी। जबकि छात्रा का मोबाइल लैब में ही पड़ा मिला था। इस मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम की अदालत में चल रही है। अभी तक इस मामले में 47 लोगों की गवाही हो चुकी है।

आगरा में शोध छात्रा हत्याकांड की सुनवाई के दौरान लाया गया आरोपी IMAGE CREDIT:

आरोपी की गिरफ्तारी को सड़कों पर उतरे थे लोग
हत्या के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन हुआ था। सड़कों पर विद्यार्थी उतर आए थे। उन्हें किसी तरह संभाला गया था। इसके बाद विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भी प्रदर्शन किया था। पुलिस पर आरोपी को पकड़ने का काफी दबाव था। पुलिस ने संस्थान के अंदर ही कई दिन तक विवेचना की थी। इसके बाद पुलिस ने संस्थान के एक छात्र उदय स्वरूप और लैब सहायक यशवीर संधू को जेल भेजा था। बाद में केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। चार्जशीट दाखिल करने के बाद केस कोर्ट में विचाराधीन है।

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छात्रा की कार में मिली थीं दो नंबर प्लेट
आगरा के एजुकेशनल इंस्‍टीट्यूट (डीईआई डिम्‍ड यूनिवर्सिटी) के बायोटेक्‍नोलॉजी लैब में शोध छात्रा की निर्ममता पूर्वक हत्‍या करने वाला बेहद शातिर था। पुलिस को छात्रा की कार में दो नंबर प्लेट मिली थी। आरोपी ने इसी से भागने की योजना बनाई थी। हत्यारे ने 17 मिनट से भी कम समय में पूरी वारदात को अंजाम दिया था।

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17 मिनट में वारदात को दिया गया था अंजाम
पुलिस के मुताबिक “घटना के दिन शाम 5.14 बजे छात्रा की बहन ने उसे कॉल की थी। कुल छह मिनट बात हुई। मोबाइल पर अगली कॉल शाम 5.37 बजे छात्रा की मां ने की। इस कॉल को हत्‍यारे ने रिसीव किया और कहा कि छात्रा सदर बाजार गई है। बहन से बात खत्‍म करने और मां की कॉल आने में केवल 17 मिनट का फासला है।” पुलिस मान रही थी कि मां का कॉल आने के वक्‍त तक छात्रा की हत्‍या हो चुकी थी और कातिल कार में था।

सबसे अहम साक्ष्य डीएनए परीक्षण रिपोर्ट बनी
सीबीआई ने 64 गवाह बनाए। साक्ष्य भी जुटाए हैं। इसमें सबसे अहम साक्ष्य डीएनए परीक्षण रिपोर्ट रही। दुष्कर्म की आशंका के चलते स्लाइड बनाई गई थी। इससे डीएनए सैंपल लिया गया था। इसका मिलान उदय स्वरूप के डीएनए से कराया गया था। दुष्कर्म की पुष्टि होने पर सीबीआई ने दुष्कर्म की धारा बढ़ाई थी। इस पर कोर्ट ने आरोपी उदय स्वरूप को दोबारा जेल भेज दिया था। इस मामले में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक सहित समेत अन्य लोग गवाह बनाए गए हैं।

अब आपको बताते हैं कब क्या हुआ

15 मार्च 2013 : दयालबाग स्थित शिक्षण संस्थान में शोध छात्रा की हत्या।
17 मार्च : पुलिस ने लैब के पास से लैपटॉप बरामद किया।
18 मार्च : संस्थान के परिसर में ही छात्रा का मोबाइल बरामद किया गया।
22 अप्रैल : पुलिस ने हत्याकांड के मामले में उदयस्वरूप और यशवीर संधू को जेल भेजा।
16 जुलाई : पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र सीओ कार्यालय भेजा।
18 जुलाई : आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया। इसमें उदयस्वरूप और यशवीर संधू को आरोपी बनाया। हत्या (302) और दुष्कर्म के प्रयास (376/511) की धारा लगाई।
22 जुलाई : प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया।
10 फरवरी 2014 : उदयस्वरूप और यशवीर संधू को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
पांच जनवरी 2016 : सीबीआई ने विवेचना के बाद आरोपपत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। सीबीआई ने पुलिस की ओर से लगाई दुष्कर्म के प्रयास की धारा को हटाया। आरोप पत्र दुष्कर्म (376) , हत्या (302) और साक्ष्य मिटाने (201) में लगाया गया। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में यशवीर संधू को क्लीन चिट दी। उदयस्वरूप पर आरोप तय किए।
दो मई 2018 : प्रदेश सरकार ने केस में प्रभावी पैरवी के लिए पूर्व डीजीसी अशोक कुमार गुप्ता को स्वतंत्र लोक अभियोजक नियुक्त किया। इसके बाद से कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है।

छात्रा का पिता ने अदालत पर जताया पूरा भरोसा
शोध छात्रा के पिता का कहना है कि अदालत पर उन्हें पूरा भरोसा है। 62 वर्ष की उम्र में वे दिल्ली से हर तारीख पर कोर्ट आते हैं। उनका कहना है “बेटी उनके सपने में आती है। बचाव पक्ष ने रोड़ा लगाने की कई बार कोशिश की थी। मगर, सफलता नहीं मिली। उनकी ओर से केस को अधिक समय तक चलाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। वे टूटने वाले नहीं हैं।” शोध छात्रा के पिता ने बताया कि अब तक 47 गवाहों की गवाही हुई है।