
हवाई जहाज
आगरा। गोल्डन ट्राईएंगिल का हिस्सा व पर्यटन नगरी आगरा में ”एयर कनेक्टिविटी जयपुर, लखनऊ, वाराणसी, उदयपुर, जोधपुर और खजुराहो आदि अन्य शहरों के सापेक्ष न के बराबर है। इसका परिणाम है कि पर्यटक आवागमन के लिए हवाई मार्ग नहीं अपना पा रहे हैं। हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटकों की संख्या अन्य पर्यटन नगरियों की तुलना में नगण्य है।
ये हैं आकड़े
आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशन (एडीएफ) के सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0 जैन द्वारा एयरपोर्ट अथॉरिटी और इण्डिया को लगाये गये सूचना आवेदन-पत्र के क्रम सूचना मिल सकी, जिससे यह खुलासा हुआ कि आगरा में वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 (अगस्त तक) ”घरेलू हवाई उड़ानों की संख्या“ 283, 415 व 194 थी, जबकि जयपुर में उक्त अवधि में यह संख्या 28596 (101 गुनी), 38069 (92 गुनी) व 17747 (92 गुनी) थी। वाराणसी में इसी अवधि में हवाई उड़ानों की संख्या क्रमशः 14019 (50 गुनी), 14323 (35 गुनी) व 6765 (35 गुनी) थी। लखनऊ में इसी अवधि में हवाई उड़ानों की संख्या क्रमशः 24540 (87 गुनी), 31231 (75 गुनी) व 15346 (79 गुनी) थी। इसी प्रकार उदयपुर में इसी अवधि में उड़ानों की संख्या क्रमशः 9084 (32 गुनी), 9836 (24 गुनी) व 4217 (22 गुनी) थी। इसी प्रकार स्थिति इलाहाबाद, ग्वालियर, जोधपुर व खजुराहो आदि की है, जहाँ आगरा की तुलना में हवाई उड़ानों की संख्या अत्यधिक है।
घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या
एयरपोर्ट अथॉरिटी की वेबसाइट से प्राप्त हुई सूचना से यह भी स्पष्ट हुआ कि आगरा में वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 (अगस्त तक) आने व जाने वाले ”घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या“ क्रमशः 9686, 12365 व 4217 थी। जबकि जयपुर में उक्त अवधि में यह संख्या क्रमशः 33,32,496 (344 गुनी), 42,29,961 (342 गुनी) व 19,19,413 (455 गुनी) थी। वाराणसी में इसी अवधि में यह हवाई उड़ानों की संख्या क्रमशः 18,11,617 (187 गुनी), 19,36,616 (157 गुनी) व 10,02,587 (237 गुनी) थी। इसी प्रकार लखनऊ, इलाहाबाद, ग्वालियर, उदयपुर, जोधपुर व खजुराहो आदि की स्थिति है, जहाँ आगरा की तुलना में हवाई यात्रियों की संख्या अत्यधिक है। वेबसाइट के माध्यम से यह भी स्पष्ट हुआ कि जयपुर में वित्तीय वर्ष 2016-17 में 4,50,962 यात्री, 2017-18 में 5,27,217 यात्री व 2018-19 (अगस्त तक) में 2,55,526 ”अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों“ का आवागमन हुआ, जबकि आगरा में यह संख्या शून्य थी।
केसी जैन के आठ सुझाव
1. समस्या को समझने व समाधान हेतु रिपोर्ट देने के लिए एक ‘समिति’ का गठन हो, जिसमें एयर इण्डिया, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इण्डिया, प्राइवेट एयरलाइन्स व पर्यटन उद्योग आदि के प्रतिनिधि हों, जो अपनी विस्तृत रिपोर्ट इस विषय पर दें कि आखिर आगरा में इतनी कम हवाई उड़ानें अन्य समकक्ष शहरों की तुलना में क्यों हैं और किस प्रकार से हवाई उड़ानों व हवाई यात्रियों की संख्या में वृद्धि की जा सकती है।
2.आगरा में नियमित फ्लाइट शेड्यूल नहीं रहता है। कभी-भी फ्लाइट शुरू हो जाती है और कभी-भी बन्द हो जाती है, जिसके कारण पर्यटकों के मध्य फ्लाइट की लोकप्रियता नहीं है। जब तक फ्लाइट्स की विश्वसनीयता नहीं होगी, पर्यटक अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में हवाई उड़ान को हिस्सा नहीं बनायेंगे। इसके लिए आवश्यक है कि फ्लाइट नियमित रहें व कैन्सिल न हों।
3. आगरा के लिए इस दुष्प्रचार को दूर किया जाये कि हवाई यात्रा से आने वाले पर्यटक व उद्यमी नहीं हैं। प्रतिवर्ष आगरा में लगभग 80-90 लाख देश-विदेश के पर्यटक आते हैं, जिनमें लगभग 6 लाख विदेशी पर्यटक होते हैं, इसके अतिरिक्त जूता, इंजीनियरिंग कम्पोनेन्ट्स, हैण्डीक्राफ्ट, कालीन, गारमेन्ट्स आदि का काफी बड़ी राशि का निर्यात होता है जो लगभग 4-5 करोड़ का होगा। पर्यटकों व उद्यमियों के लिए एयर कनेक्टिविटी अति आवश्यक है।
4. आगरा के लिए वर्तमान में मात्र दो फ्लाइट हैं, जो एयरइण्डिया व एलाइन्स एयर की हैं, जो ”आगरा से खजुराहो“ और ”आगरा से जयपुर“ के लिए हैं।
5. लम्बी दूरी जैसे-मुम्बई, गोवा, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता आदि के लिए पर्यटक व उद्यमी हवाई उड़ानों का उपयोग करेंगे। दिल्ली आदि जैसी छोटी दूरी के लिए हवाई उड़ान की अधिक स्वीकार्यता नहीं है।
6.”उड़ान योजना“ (Regional Connectivity) के अंतर्गत इलाहाबाद में अनेक फ्लाइट हैं। आगरा में भी इस योजना के अंतर्गत हवाई उड़ानों की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए।
7. आगरा में गैर-प्रदूषणकारी आईटी उद्योग व गारमेन्ट्स मैन्युफैक्चिरिंग आदि को बढ़ावा देने के लिए एयर कनेक्टिविटी बढ़नी चाहिए।
8. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इण्डिया द्वारा यथाशीघ्र नया सिविल एन्क्लेव बनाया जाना चाहिए, जिसके लिए पर्यावरण मंत्रालय एवं टी0टी0जेड0 अथॉरिटी को अपनी अनापत्ति बिना किसी रुकावट के प्रदान करनी चाहिए ताकि नये सिविल एन्क्लेव के निर्माण के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके। एडीएफ की ओर से यह भी मांग की गई है कि जहाँ एक ओर आगरा में गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की ही स्थापना हो सकती है वहाँ केन्द्र व राज्य सरकार इस सम्बन्ध में पहल करें ताकि पर्यटन व गैर-प्रदूषणगारी उद्योगों की गति को बल मिल सके।

Published on:
21 Oct 2018 04:37 pm

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