
फायरिंग
आगरा। लोकसभा चुनाव से पहले असलाह रखने वालों से एक एक कारतूस का हिसाब मांगा गया है। जिन लोगों ने कारतूस का इस्तेमाल किया है और उसका ब्योरा उनके पास नहीं है, ऐसे लोगों के लाइसेंस को निरस्त भी किए जा सकते हैं। डीजीपी मुख्यालय में आए इस आदेश के बाद पुलिसकर्मी ऐसे लाइसेंस धारकों की छानबीन में जुट गए हैं। वहीं इस नियम से असलाह धारकों में हड़कम्प मच गया है। एक एक कारतूस के लिए अब हिसाब किताब जोड़ा जा रहा है।
लेखा जोखा मांगा गया
चुनाव को लेकर डीजीपी मुख्यालय से नए निर्देश लाइसेंसधारकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। जनपद में लाइसेंसधारकों से इस्तेमाल किए गए कारतूसों का पूरा लेखा जोखा मांगा गया है। सूत्रों के मुताबिक जनपद में जिन लोगों ने बिना किसी कारण के फायरिंग की होगी, उसे हर्ष फायरिंग की श्रेणी में मानकर उनका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। न्यायालय के निर्देश पर बनाई गई ये स्क्रीनिंग कमेटी ही असलहे जमा कराने पर निर्णय लेगी। वहीं जिन लोगों ने कारतूस का इस्तेमाल किया होगा, उनसे ब्योरा लिया जाएगा कि कब और किन परिस्थितियों में उनके द्वारा असलाह से फायरिंग की गई। उन्होंने जब भी फायर किया तो उनके सामने क्या समस्या थी। यदि कोई परेशानी थी तो इसकी सूचना पुलिस या संबंधित थाने को दी गई या नहीं। ऐसे लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कारतूस के हिसाब के लिए जोड़तोड़
लाइसेंसी बंदूक, राइफल और रिवाल्वर जैसे हथियार रखने के शौकीनों को इस नियम के बाद एक झटका सा लगा है। पुराने कारतूस का ब्योरा जुटाने के लिए जोड़तोड़ की जा रही है। एक एक कारतूस का हिसाब मांगने वाली पुलिस के लिए जवाब देना भी कड़ी चुनौती होगा।
Published on:
24 Jan 2019 12:18 pm
