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ऐसे करें नवरात्र पर कलश की स्थापना, बन जाएंगे करोड़पति, ऐसा है संयोग

कलश के नीचे बालू की वेदी होती है जिसमें जौ को बोया जाता है। इस विधि में धन धान्य देने वाली अन्नपूर्णा देवी की पूजा होती है।

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आगरा

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Abhishek Saxena

Oct 07, 2018

navratri 2018

दस अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र

आगरा। नवरात्र पर्व पर कलश स्थापना का बहुत महत्व होता है। कई लोग पूजा अर्चना तो करते हैं। लेकिन, कलश की स्थापना नहीं करते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रमोद गौतम का कहना है कि घटस्थापना करने से मां दुर्गा की कृपा परिवार पर बरसती है। मां दुर्गा की कृपा से सारे रुके हुए काम पूरे होते हैं और घर सुख संपत्ति के साथ धन धान्य से परिपूर्ण होता है।

ये है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार की नवरात्रि का घटस्थापना का शुभ महूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 11 मिनट तक है। पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि नवरात्रि में घट स्थापना करते समय कुछ नियमों का पालन करने से माता की पूजा सफल होती हैं।

1– उत्तर–पूर्व दिशा यानी (ईशान कोण) देवताओं की दिशा है। इसलिए, इस दिशा में माता की प्रतिमा और घट स्थापना करें।

2– घट स्थापना सदैव शुभ मुहूर्त में और स्नान के बाद ही करें। पूजा स्थान से थोड़ी दूर पर एक पाटे पर लाल व सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं। नवरात्रि की इस पूजा में सबसे पहले गणेशजी का पूजन किया जाता है। कलश को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है, जो कि भगवान विष्णु का प्रतिरूप माना जाता है। कलश पर स्वस्तिक बनाएं और इसके गले में मौली बांधें। पांच प्रकार के पत्तों से कलश को सजाते हुए इस घट या कलश में हल्दी की गांठ, साबुत सुपारी, दुर्वा और मुद्रा रखी जाती है। एक जटाधारी नारियल को लाल कपड़े में बांधकर उसे कलश पर रख दें और ध्यान रहे कि नारियल का मुंह आपकी ओर रहे।

3– पूजा करते समय सारे देवताओं को इन समस्त दिनों के दौरान विराजमान रहने के लिए प्रार्थना करें। कलश के नीचे बालू की वेदी होती है जिसमें जौ को बोया जाता है। इस विधि में धन धान्य देने वाली अन्नपूर्णा देवी की पूजा होती है। मां दुर्गा की प्रतिमा को पूजा स्थान के बीच में स्थापित करते समय उसे अक्षत, चुनरी, सिंदूर, फूलमाला, रोली, साड़ी, आभूषण और सुहाग से सुसज्जित करें। कलश की पूजा व टीका करने के बाद देवी माँ की चौकी स्थापित करें।

4– सुबह के समय देवी पूजन में माता को फल व मिठाई और रात में दूध का भोग लगाएं। पूजा के समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अखंड दीया जलाएं जो व्रत के पारण तक जलता रहे।

5– कलश के स्थापित हो जाने के बाद गणेशजी और मां दुर्गा की आरती से 9 दिनों का व्रत प्रारंभ कीजिए।

6– भक्तजन पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम के समय मां दुर्गा की विधि विधान से पूजा करके अपना व्रत खोलते हैं।

7– जिस दिन नवरात्र पूरा हो रहा हो उस दिन हलवा–पूरी का भोग जरूर लगाएं। अंतिम दिन के दौरान नवरात्रि जवारा का विसर्जन आवश्यक है।