Krishna Janmashtami पर ये है अभिजीत मुहूर्त, गृहस्थों के लिए पूजा का शुभ समय

Krishna Janmashtami पर ये है अभिजीत मुहूर्त, गृहस्थों के लिए पूजा का शुभ समय

Abhishek Saxena | Publish: Sep, 02 2018 10:38:05 AM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

स्मार्त सम्प्रदाय की जन्माष्टमी आज, निशीथ काल में पूजा करेगा वैष्णव सम्प्रदाय

आगरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तीन सितम्बर को मनाई जाएगी। लेकिन, स्मार्त सम्प्रदाय आज जन्माष्टमी मना रहा है। जन्माष्टमी पर्व मनाने के लिए अभिजीत मुहूर्त का बहुत महत्व माना जाता है। वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने जन्माष्टमी पर्व पर निशीथ काल का पूजन का समय बताते हुए कहा कि वैष्णव और स्मार्त सम्प्रदाय को जन्माष्टमी पर्व पर अभिजीत मुहूर्त अर्थात निशीथ काल में पूजन करना चाहिए। श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पूरे भारत वर्ष में विशेष महत्‍व है। यह हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। मान्यता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु ने श्रीकृष्‍ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। देश के सभी राज्‍य अलग-अलग तरीके से इस महापर्व को मनाते हैं।

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जन्‍माष्‍टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदाय के लिए
इस बार अष्टमी दो सितंबर की रात 08:46 पर लगेगी और तीन सितम्बर की शाम 07:19 पर खत्म हो जाएगी। अष्‍टमी तिथि का प्रारंभ दो सितंबर 2018 को रात 08 बजकर 46 मिनट पर होगा। अष्‍टमी तिथि का समापन ती सितंबर 2018 को शाम 07 बजकर 19 मिनट पर हो रहा है। वहीं रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ दो सितंबर की रात 8 बजकर 48 मिनट पर होगा। रोहिणी नक्षत्र का समापन तीन सितंबर की रात 8 बजकर 08 मिनट पर होगा।

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गृहस्थों के लिए ये है पूजा का समय
निशीथ काल पूजन का समय स्मार्त सम्प्रदाय अर्थात गृहस्थों के लिए दो सितंबर 2018 को रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। वहीं व्रत का पारण तीन सितंबर की रात 8 बजकर 08 मिनट के बाद होगा। वैष्‍णव कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी तीन सितंबर को है और व्रत का पारण अगले दिन चार सितंबर को सूर्योदय से पहले 6:13 पर होगा।

जन्‍माष्‍टमी का व्रत कैसे रखें
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि जो भक्‍त श्रीकृष्ण जन्‍माष्‍टमी का व्रत रखना चाहते हैं उन्‍हें एक दिन पहले केवल एक समय का भोजन करना चाहिए। जन्‍माष्‍टमी के दिन सुबह स्‍नान करने के बाद भक्‍त व्रत का संकल्‍प लेते हुए अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्‍टमी तिथि के खत्‍म होने के बाद पारण यानी कि व्रत खोल सकते हैं। श्रीकृष्‍ण की पूजा निशीथ काल यानी कि आधी रात को की जाती है।

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