
महिला से मिलती-जुलती सांकेतिक तस्वीर जेनरेट Ai
Agra News: आगरा में एक महिला की मौत और जिंदगी के बीच की कहानी ने परिवार को पहले हैरान किया और फिर गहरे दुख में डाल दिया। बदायूं में डॉक्टरों ने शीला देवी को मृत घोषित कर दिया था। परिजन शव लेकर घर पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी। करीब 17 घंटे बाद शरीर में हलचल हुई तो दामाद ने उन्हें छूकर देखा। महिला ने हाथ पकड़कर खुद को जिंदा बताया। उम्मीद लेकर परिवार उन्हें आगरा लाया। लेकिन नौ दिन बाद रविवार सुबह उनकी मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के ट्रांस यमुना इलाके की श्रीनगर कॉलोनी में रहने वाली 65 वर्षीय शीला देवी के परिवार ने नौ दिन के भीतर जिंदगी और मौत के दो बेहद दर्दनाक पल देखे। जिस महिला को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। उनके शरीर में अंतिम संस्कार से पहले हलचल हुई। परिवार ने इसे जिंदगी की उम्मीद माना और बेहतर इलाज के लिए उन्हें आगरा लेकर आया। करीब नौ दिन तक उपचार चला, लेकिन रविवार सुबह शीला देवी ने दम तोड़ दिया।
शीला देवी को लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। उनके लीवर में भी दिक्कत बताई गई थी। वह अपने बड़े बेटे सुनील माहौर के साथ आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र स्थित श्रीनगर कॉलोनी में रहती थीं। उनके पति हरिओम माहौर का पहले ही निधन हो चुका है। उनका दूसरा बेटा संजीव बदायूं के एक निजी अस्पताल में काम करता है।
करीब डेढ़ महीने पहले शीला देवी इलाज के लिए बदायूं अपने बेटे के पास गई थीं। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजन महिला का शव एंबुलेंस से लेकर घर पहुंचे। शाम के समय शव घर के एक कमरे में रखा गया। परिवार में मातम शुरू हो गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां होने लगीं। फूल-मालाएं भी मंगवा ली गई थीं। घर में हर कोई अंतिम विदाई की तैयारी में जुटा था।
इसी दौरान करीब 17 घंटे बाद ऐसा हुआ। जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। शीला देवी के दामाद ने जब उन्हें छुआ तो उन्हें शरीर में हलचल महसूस हुई। बताया गया कि महिला ने दामाद का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद उन्होंने परिवार से कहा कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। सभी लोग रो क्यों रहे हैं। उन्होंने खुद के जिंदा होने की बात भी कही।
यह देखकर परिवार में अफरा-तफरी मच गई। अंतिम संस्कार की तैयारी रोक दी गई। उन्हें तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद बेहतर इलाज की उम्मीद में बड़े बेटे सुनील उन्हें आगरा लेकर आए। निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया।
परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद शीला देवी की हालत में सुधार होगा। वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगी। करीब नौ दिनों तक अस्पताल में उपचार चलता रहा। परिजन उनकी हालत में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन रविवार सुबह उनकी सांसें थम गईं। शीला देवी की मौत की खबर मिलते ही परिवार में एक बार फिर मातम छा गया। कुछ दिन पहले जिस घर में अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच अचानक जिंदगी की उम्मीद जगी थी, वहीं अब परिवार को उन्हें हमेशा के लिए खोने का गम झेलना पड़ा।
Updated on:
09 Aug 2026 04:38 pm
Published on:
09 Aug 2026 04:38 pm
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