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Live बाबा मनकामेश्वर नाथ का भंडारा भी क्या खूब है, पढ़िए सबको सीख देने वाली खबर

-हजारों लोगों की उपस्थिति, पत्तल पर भोजन और पास में ही पाकशाला, फिर भी गजब की सफाई -दरेसी में वाहनों की चिल्ल-पौं के स्थान पर हर-हर महादेव की गूंज, लोग आते गए और भंडार बढ़ता रहा

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आगरा

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Amit Sharma

Nov 04, 2019

Live बाबा मनकामेश्वर नाथ का भंडारा भी क्या खूब है, पढ़िए सबको सीख देने वाली खबर

Live बाबा मनकामेश्वर नाथ का भंडारा भी क्या खूब है, पढ़िए सबको सीख देने वाली खबर

आगरा। बाबा मनकामेश्वर नाथ का भंडारा भी क्या खूब है। हजारों लोगों ने प्रसाद चखा। लोग आते गए और भंडार बढ़ता चला गया। कहीं कोई कमी नहीं। कोई आपाधापी नहीं। सबकुछ शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा। जितने लोग पंगत में, उससे अधिक लोग खड़े हैं। इंतजार है। प्रसाद लेकर ही जाएंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। आसपास के स्कूली बच्चे भी प्रसाद लेकर ही गए। वे घर पर कहकर आए थे कि आज खाना नहीं बनाना, बाबा का भंडारा है।

दरेसी पर स्थापित किए बाबा

दरेसी में मुख्य मार्ग पर भंडारा आयोजित किया गया। यह अत्यधिक भीड़ वाला इलाका है। पूरे दिन चिल्ल-पौं रहती है। वाहनों के हॉर्न बजते रहते हैं। बाजार सोमवार को बंद रहता है। इसके चलते सोमवार को यहां फुटपाथ बाजार लगाता है। आसपास के लोग आकर खरीदारी करते हैं। वह काम भी चल रहा था। पुलिस ने जामा मस्जिद और रावतपाड़ा की ओर से बैरियर लगाकर वाहनों का आवागमन रोक दिया था। चाकचौबंद व्यवस्थाएं थीं। सड़क पर ही बाबा मनकामेश्वर को स्थापित किया गया था। श्रद्धालु बाबा की ओर सजल नेत्रों से निहार रहे थे। बता दें कि शहर में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिनका दिन बाबा के दर्शन के साथ शुरू होता है।

दिखाई दिया स्वच्छ भारत अभियान

मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहरपुरी स्वयं सारी व्यवस्थाएं संभाल रहे थे। श्रद्धालुओं को परसाई में आधा गिलास पानी दिया जा रहा था। गंदगी का नामोनिशान नहीं था। आमतौर पर भंडार होता है तो चारों और गंदगी छितरा जाती है। बड़ा खतरनाक दृश्य पैदा हो जाता है। हजारों लोगों की उपस्थिति, पत्तल पर भोजन और पास में ही पाकशाला होने के बाद भी स्वच्छता देखते ही बनती थी। प्रसाद को परोसने वाले थे, लेकिन श्रद्धालु भी सेवा कर रहे थे। पत्तल कहां जा रही थी, किसी को कुछ पता नहीं था।

धर्मगुरु आए तो खुशी कई गुना बढ़ गई

विशिष्टजन भी लगातार आ रहे थे। उनके गले में राम नाम का दुपट्टा डालकर स्वागत सत्कार किया जा रहा था। मंहत योगेश पुरी तो वार्तालाप में निपुण हैं। वे जब किसी की प्रशंसा करते हैं तो लगता है कानों में मिसरी घोल दी है। जब सिख धर्म की ओर से टीटू सिंह और मास्टर गुरनाम सिंह, मुस्लिम धर्म की ओर से मोहम्मद उजैर आलम और ईसाई धर्म की ओर से फादर मून लाजरस आए तो भंडार में साम्प्रायिक सद्भाव का भी रस मिल गया। खुशी कई गुना बढ़ गई। सबने एक साथ बैठक भोजन किया। बाबा के दरबार के समक्ष खड़े होकर सद्भाव बढ़ाने वाली बातें कहीं तो हर-हर महादेव की गूंज होने लगी।

सबसे अलग बात

भंडारे में आने के दो कारण होते हैं- प्रसाद तो मुख्य बात है ही, साथ ही धर्मलाभ। बाबा के दरबार में मत्था टेक लेंगे। हर-हर महादेव का जयकारा बार-बार लगाया जा रहा था। आगरा में भंडारों की परंपरा है। आमतौर पर होता यह है कि दोने में पूरी और सब्जी दी जाती है। पूरी सब्जी खत्म तो भंडारा भी समाप्त। मनकामेश्वर मंदिर के भंडारे की की खासियत यह है कि अंतिम व्यक्ति के आने तक भंडार भरा रहता है। प्रसाद बच गया तो उसका वितरण किया जाता है। यही इस भंडारे की सबसे अलग बात है।

इनकी सुनिए

इस बारे में पूछे जाने पर मंहत योगेश पुरी ने बताया कि सारी व्यवस्थाएं बड़े महाराज जी ( हरिहरपुरी) ने संभाली हैं। हम यह दिखाना चाहते हैं कि बड़े आयोजनों में भी स्वच्छता की मिसाल कायम की जा सकती है। बल्केश्वर निवासी आदर्शनंदन गुप्त ने कहा कि सभी जगह इसी तरह से भंडारे होने चाहिए। हर जगह स्वच्छ भारत अभियान दिखना चाहिए। जयपुर हाउस निवासी संजय गोयल ने कहा कि वे यहां की व्यवस्थाएं देखकर हतप्रभ हैं। भाजपा नेता राजकुमार पथिक ने कहा कि भंडारा सबको सीख देने वाला है।