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आगरा। दलितों के हितों की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने सूबे के दलितों को आगरा से बड़ा संदेश दिया है। योगी आदित्यनाथ ने अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में भाग लेकर स्पष्ट कर दिया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की नजर दलितों के वोट बैंक पर सबसे अधिक है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से बिना किसी का नाम किए हमला बोला उससे स्पष्ट है कि आने वाले चुनाव में भाजपा द्वारा सपा, बसपा, कांग्रेस के गठबंधन को विफल करने की कवायद तेज हो गई हैं। एससी और भाजपा के जुड़ाव के कई उदाहरणों को देकर सीएम योगी अनुसूचित समाज को अपने खेमे में खींचने का काम किया।
दलितों पर नजर, मायावती के लिए होगी बुरी खबर
दलितों का वोट बैंक साधने के लिए भाजपा ने कार्यक्रम तय कर लिए हैं। जल्द ही बड़ी योजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यक्रम में हुए कई योजनाएं को शुरू करने के लिए दिशा निर्देश दिए हैं। आगरा मायावती के लिए लकी जोन है। इस विधानसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो पिछले दो विधानसभा चुनाव में बसपा की हनक यहां सुनाई देती थी। आगरा में तीस प्रतिशत के करीब एससी एसटी वोटर्स हैं जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन वोटर्स को भारतीय जनता पार्टी में खींचने के लिए योगी आदित्यनाथ ने जो ऐलान किए हैं, वे नीले खेमे में खलबली मचाने वाले हैं।
इन कार्यक्रम के जरिए वोट बैंक को साधने की कोशिश
सूबे के दलितों को साधने के लिए अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में जो कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। उनमें बूथ स्तर पर 21 सदस्यीय समिति का अभिनंदन होना, प्रदेश के 1.40 बूथों पर 30 लाख कार्यकर्ताओं का अभिनंदन शामिल हैं। वहीं 15 दिसम्बर तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में पदयात्रा निकाली जाएंगी, हर घर में दस्तक दी जाएगी। 150 कार्यकर्ता इसमें भाग लेंगे। 80 लोकसभा क्षेत्रों में 17 नवंबर को बाइक रैली के जरिए हर बूथ से पांच कार्यकर्ता को शामिल किया जाएगा। एससी समाज के पदाधिकारी को सदस्या बनाने का कार्यक्रम है। एससी समाज के प्रबुद्ध वर्ग की सूची क्षेत्रवार तैयार की जाएगी। एससी समाज का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन जल्द किया जएगा। समाज कल्याण विभाग 252 छात्रावासों को एससी समाज के पदाधिकारियों को गोद देने की योजना बना रहा है।
एससी एसटी पर जोर, सवर्णों का रोष
आगरा में एससी एसटी पर योगी आदित्यनाथ ने जोर दिया तो वहीं सवर्ण समाज में रोष व्याप्त है। सर्व समाज संघर्ष समिति द्वारा एससी एसटी एक्ट के संशोधन को वापस लेने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। ये आंदोलन 2019 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित कर सकता है, लेकिन, सरकार एससी वोटर्स को नाराज नहीं करना चाहती है, इसलिए अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
Updated on:
22 Oct 2018 06:53 pm
Published on:
22 Oct 2018 12:13 pm
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