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कहीं दूर बाहों से बाहें, उंगलियों में कहीं उंगलियां हैं..

हिन्दुस्तान के मशूहर कवि सोम ठाकुर गीत गाते रहे और सभी को लुभाते रहे।

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som thakur

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आगरा। आकाशगंगा एजुकेशनल एन्ड कल्चरल सोसायटी के कार्यक्रम कविता गीत गज़ल में गीत गंगा अविरल बहती रही। हिन्दुस्तान के मशूहर कवि सोम ठाकुर, जिन्हें पूरे विश्व में सुना जाता है, गीत गाते रहे और सभी को लुभाते रहे।

तुम आए नैनों के द्वारे

सोम दादा ने सुनाया रूप दर्शन का गीत सुनकर हर गोई भावविभोर हो गया-

तुम आए नैनों के द्वारे, तुम आये नैनो के द्वारे, दर्पण दर्पण मन मेरा, भोर बहके,सांझ चहके रात महके ओ पिया,

तुम आये गंधों के द्वारे , चंदन चंदन मन मेरा, ओ पिया, तुम आये नैनों के द्वारे दर्पण दर्पण मन मेरा

दूरियां दूरियां दूरियां हैं

सोम ठाकुर का दूसरा गीत बहुत पसंद किया गया-

दूरियां दूरियां दूरियां हैं तुम कहां हो बड़ी सर्दियां हैं

जिंदगी का यही सिलसिला है जिसकी किस्मत में जो था वही मिला है,

है कहीं दूर बाहों से बाहें, उंगलियों में कहीं उंगलियां हैं

जो लबों तक कभी आ ना पाई, चाहते चांदनी में नहाई, ताज के स्वप्न मन में लिए हैं, देखने में जो देवियां हैं

दूरियां दूरियां दूरियां हैं तुम कहां हो बड़ी सर्दियां हैं।

श्रोताओं को लुभाया

एक के बाद एक गीत सुनाकर सोम दादा ने माहौल को बेहद ख़ूबसूरत बना दिया और श्रोताओं को खूब लुभाया। कार्यक्रम का संयोजन एवम संचालन शायर कमल आशिक़ ने किया। डॉ राजकुमार रंजन, भाई भरत दीप, शूटर राजा अग्रवाल और काव्या अग्रवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर उत्साहवर्धन किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था अध्यक्ष कामिनी अग्रवाल ने किया।

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