
आगरा। 72 घंटे में हुई बलात्कार की तीन वारदातों ने जहां जनपद को झकझोर कर रख दिया तो पुलिस के लिए बलात्कार के मामले काफी पेचीदगी भरे होते हैं। कहीं बाप ही अपनी बेटी की आबरू के साथ खेल रहा है तो कहीं पड़ोसी बेटियों का जिस्म नोंच रहे हैं। साल दर साल ये आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस तफ्दीश में जुटती है लेकिन, जांच को अंजाम तक नहीं पहुंचा पाती है। बीते तीन सालों की बात करें तो आगरा में 2018 के मार्च तक 209 मामले सामने आ चुके हैं।
पिता ने बनाया बेटी को हवस का शिकार
बलात्कार के मामले में आगरा जनपद में दो ऐसे केस सामने आए, जिन्होंने रिश्तों को कलंकित कर दिया। मलपुरा क्षेत्र में बाप ने अपनी बेटी को हवस का शिकार बनाया तो शाहगंज में भी किशोरी अपने कलयुगी पिता की भूख का निशाना बनी। पुलिस ने दोनों ही मामलों में आरोपियों को पकड़कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
फर्जी भी पाए गए केस
बलात्कार के मामले पुलिस के लिए भी चुनौती भरे होते हैं। कुछ मामले फर्जी भी बना दिए जाते हैं। 2016 में जो मामले दर्ज हुए उनमें से सात मामले फर्जी पाए गए। पुलिस को बहुत एहतियात बरत कर इन मामलों में कार्रवाई करनी पड़ती है।
2016 से ये मामले आए सामने
बलात्कार के मामलों में साल 2016 में 92 केस सामने आए। जिसमें से सात मामलों को खारिज कर दिया गया। इसी तरह 2017 में 86 मामलों में से आठ मामले खारिज किए गए। इस साल 2018 में 31 मामले पुलिस के सामने आ चुके हैं। जिनमें तीन मामले खारिज किए गए हैं। बात यदि एफआर और चार्जशीट की जाए तो साल 2016 में 14 मामलों में एफआर लगाई गई और 71 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई। वहीं 2017 में 13 मामलों में एफआर लगाई गई और 63 मामलों में चार्जशीट लगाई गई। एसपी सिटी कुंवर अनुपम सिंह का कहना है कि मामलों में कार्रवाई की जा रही है।
Published on:
27 Apr 2018 10:13 am
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