
आगरा के महात्मा गांधी मार्ग पर इस कारण निकाला सत्याग्रह मार्च
आगरा। सिविल सोसायटी आगरा के तत्वावधान में गांधी जयंती के अवसर पर आगरा की एयर कनेक्टिविटी को भारत सरकार की 'उडान' योजना के तहत आगरा की जरूरत के अनुसार उच्चीकृत करने की मांग को लेकर सत्याग्रह मार्च का आयोजन किया गया। मार्च शहीद भगत सिंह छात्रावास (निकट राजामंडी चौराहे) से शुरू हुआ।
आगरा के नागिरिकों की अहम जरूरत को सरकार के समक्ष उठाए जाने के लिए गांधी जी के सत्याग्रह अस्त्र का सार्थक उपयोग करार दिया। वक्ताओं ने कहा जनतांत्रिक व्यवस्था बहुत ही मुश्किल से भारत वासियों ने हासिल की है। चुनी हुई सरकारों के शीर्ष पदस्थ जब वायदा खिलाफी करते हैं या फिर नागरिकों की जरूरतों को नजरअंदज करने लगते हैं तो सबसे पहले जनतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनियता पर ही चोट पहुंचती है। आगरा के लोगों के द्वारा ऐसा ही हुआ है। एयर कनेक्टिविटी को नागरिकों की जरूरत को लेकर सरकार अब तक कुछ भी नहीं कर सकी है। यही स्थिति कमोवेश नये सिविल एन्कलेव के निर्माण की योजना को लेकर है। अब तक जमीन अधिग्रहण करने तक का काम नहीं हुआ है। जबकि किसान जमीन देने के लिये तैयार बैठे हैं।
सत्याग्रह के मुख्यमुद्दे
(1) भारत सरकार की उडान योजना के तहत आगरा को बंगलूरू, कोलकत्ता, पुणे, मुम्बई, गोवा और चेन्नई-तिरुअंतपुरम से जोड़ा जाये।
(2) 'आगरा-इलहाबाद-गोरखपुर' के बीच 'उडान' योजना के तहत फ्लाइट तत्काल शुरू कर ही दी जानी चाहिये। यह इलहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं, वादकारियों और बुद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों से आगरा से सीधे संपर्कों के लिये निहायत जरूरी है। यही नहीं इस फ्लाइट के माध्यम से गोरखपुर स्थिति गोरखनाथ पीठ में आस्थावान नाथ समुदाय के आस्थावानों को भी भारी राहत मिलेगी।
आम आदमी की जरूरत
आगरा सिविल सोसायटी के जनरल सैकेट्री अनिल शर्मा ने बताया कि सत्याग्रह मार्च से अब यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि एयर कनेक्टिविटी पर्यटक या धन संपन्नों के लिये ही नहीं अब आम आदमी की जरूरत है। सभी प्रमुख रूटों पर जहां एक ओर निहायत जरूरी होने पर भी रेलवे के रिजर्वेशन नहीं मिलते? वहीं दूसरी ओर कई कई दिन की रेल यात्राओं के लिए छुट्टियां नहीं मिल पाती हैं। स्टूडैंट या फिर छोटी छोटी तनख्वाओं पर नौकरी करने वालों के लिये मुश्किलें बढ़ी हैं। दक्षिण भारत सहित देश के सुदूर क्षेत्रों में नौकरी करने वालों को तो इससे मानसिक द्वन्द की स्थिति तक से गुजरना पड़ता है। परिवार के सुखदुख के मौकों तक पर इन लोगों को छुट्टियां न मिल पाने के कारण मन मसोस के रह जाने को मजबूर होते हैं।
राजनीतिज्ञों के भरोसे नहीं छोड़ सकते
जब यह स्पष्ट हो गया कि आगरा के राजनीतिज्ञों में से अधिकांश विधायकों में आगरा की बात सशक्त तरीके से उठाये जाने में जन अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो सोसायटी ने तय किया कि एयर कनेक्टिविटी का मामला केवल राजनीतिज्ञों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। यह एक आम आदमी की जरूरत से जुडा मुद्दा है और हम इसके लिये सरकार से संवाद के सबसे सहज और परखे सशक्त माध्यम जिससे कि अक्सर गांधीवादी अहिंसक हथियार भी कहा जाता है उसे अपनाते हुए सत्याग्रह करेंगे।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर कप्तान सिंह, रत्यवीर, ब्रज किशोर, नवल किशोर, श्रीपति सिंह, विजेंद्र सिंह मास्टर, पपू, धर्मसिंह, हरी सिंह, हरिया सिंह, भूप सिंह, पदम सिंह और नित्य प्रकाश ने सहभागिता की और अपनी जमीन देने का संकल्प दोहराया। शहीद स्मारक में समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्षद एवं सिविल सोसायटी आगरा के अध्यक्ष डॉ. शिरोमणी सिंह ने की। संचालन डॉ. मधु भारद्वाज के द्वारा किया गया। इस दौरान सुशील गुप्ता, गिरधर शर्मा, राकेश चौहान, अनिल वर्मा, किसान नेता निहाल सिंह आदि मौजूद थे।
सत्याग्रही पदयात्री शहीद स्मारक पहुंचे
सामाजिक संगठनों, राजनीतिक पार्टियों और सीबीएसई स्कूलों के संचलकों के संगठन आप्सा के सदस्यों के द्वारा संचालित स्कूलों के छात्रों की इसमें मुख्य भागीदारी रही। कई स्कूलों के जत्थों ने सेंटजॉस कॉलेज चौराहे से इसमें शिरकत की। सेंटजॉस कॉलेज चौराह, हरीपर्वत चौराह होते हुए सत्याग्रही पदयात्री शहीद स्मारक पहंचे।
Published on:
02 Oct 2018 03:27 pm
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